कोच्चि। केरल के एरणाकुलम (ग्रामीण) ज़िले में पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए नशे के कारोबार की कमर तोड़ दी है।
जिला पुलिस प्रमुख एम. हेमलता के नेतृत्व में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 3,209 मामले दर्ज, 3,397 लोगों की गिरफ्तारी, और करीब 475 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में दोगुना से अधिक है। 2024 में जहां 2,037 केस दर्ज हुए थे, वहीं 2,217 गिरफ्तारियां और 270 किलो गांजा की बरामदगी हुई थी। इस साल के आंकड़े बताते हैं कि नशे के नेटवर्क पर पुलिस ने अभूतपूर्व सख्ती बरती है।
नशे का रास्ता: ओडिशा और आंध्र प्रदेश से केरल तक
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य में नशे की अधिकांश खेप प्रवासी मजदूरों के जरिए ओडिशा और आंध्र प्रदेश से लाई जा रही थी।
एक किलो गांजा जो वहां 2,000 से 3,000 में खरीदा जाता है, वही केरल में 25,000 से 30,000 तक की ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा था।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, यह माल आमतौर पर ट्रेन के जरिए एरणाकुलम और अंगमाली तक पहुंचाया जाता था, जहां से पूरे जिले में इसकी तस्करी फैलाई जाती थी।
सिर्फ गांजा नहीं, बल्कि ‘ड्रग्स का पूरा पैकेज’
अंगमाली क्षेत्र से इस वर्ष पुलिस ने गांजा के साथ-साथ कई प्रकार के मादक पदार्थ जब्त किए हैं—
एमडीएमए, मेथामफेटामाइन, चरस का तेल (हैशिश ऑयल), हेरोइन, एलएसडी स्टाम्प, और नाइट्राजेपम की गोलियां।
पुलिस ने बताया कि इनमें से ज्यादातर बेंगलुरु से कार या बस द्वारा केरल में लाए गए थे।
‘मिशन पुनर्जनी’: प्रवासी मजदूरों पर निगरानी और पुनर्वास
एरणाकुलम पुलिस ने केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित न रहकर सामाजिक पुनर्वास की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।
विभाग ने ‘मिशन पुनर्जनी’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य प्रवासी मजदूरों के बीच नशे के उपयोग और तस्करी पर रोक लगाना है।
इसके तहत पुलिस श्रमिक बस्तियों में जाकर जागरूकता अभियान चला रही है और स्थानीय संगठनों की मदद से पुनर्वास प्रयासों को बढ़ावा दे रही है।
एरणाकुलम पुलिस की इस सख्त कार्रवाई ने नशे के कारोबार में हलचल मचा दी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा ताकि केरल को “ड्रग-फ्री स्टेट” बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।










