नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को विदेशी कंपनियों को भारतीय बैंकों के अधिग्रहण की अनुमति देने के कदम को “अविवेकपूर्ण” करार देते हुए गंभीर वित्तीय जोखिम की चेतावनी दी है। पार्टी ने कहा कि यह कदम भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
कांग्रेस के संचार मामलों के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1969 में विदेशी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था, तो उस समय जनसंघ ने उनकी आलोचना की थी। अब धीरे-धीरे विदेशी कंपनियों को भारतीय बैंकों का अधिग्रहण करने की अनुमति दी जा रही है, जो देश के वित्तीय ढांचे में गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
रमेश ने उदाहरण देते हुए कहा, “पहले, लक्ष्मी विलास बैंक का सिंगापुर के डीबीएस ग्रुप ने अधिग्रहण किया। इसके बाद कैथोलिक सीरियन बैंक को कनाडा के फेयरफैक्स ने खरीदा। फिर जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन ने येस बैंक का अधिग्रहण किया। अब दुबई का एमिरेट्स एनबीडी बैंक आरबीएल बैंक में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा रखता है, यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सौदा है।”
उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में भारत के निजी क्षेत्र के पहले बैंक, आईडीबीआई बैंक का पूर्ण निजीकरण यानी विनिवेश भी पूरा होने की संभावना है। जयराम रमेश ने जोर देकर कहा कि इस तरह के अधिग्रहण से वित्तीय प्रणाली में विदेशी नियंत्रण बढ़ सकता है और देश की आर्थिक स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस मामले में सावधानी बरतनी चाहिए और भारतीय बैंकिंग सेक्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।








