बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ने सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण, जिसे व्यापक रूप से ‘जाति जनगणना’ कहा जा रहा है, को पूरा करने की तारीख 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
शिवकुमार ने बताया कि सर्वेक्षण की शेष अवधि के दौरान शिक्षकों को गणना कार्य में शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि अन्य सरकारी कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सर्वेक्षण में सक्रिय रूप से भाग लें और सभी प्रश्नों के सही उत्तर दें।
कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा आयोजित यह सर्वेक्षण 22 सितंबर से शुरू हुआ था, और मूल रूप से 7 अक्टूबर को समाप्त होना था। बाद में इसे 18 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया था, ताकि दशहरा की छुट्टियों के दौरान भी सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की मदद से गणना पूरी की जा सके।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने रविवार को वरिष्ठ मंत्रियों, अधिकारियों और आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर. नाइक के साथ सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा की। डीके शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु दक्षिण, बीदर और धारवाड़ को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बेंगलुरु शहर में 67 प्रतिशत डेटा एकत्रित किया गया है, जिसमें 20 प्रतिशत लोगों ने जानकारी नहीं दी।
शिवकुमार ने कहा,
“दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए 20, 21 और 22 अक्टूबर को छुट्टियाँ रहेंगी। इस दौरान गणना कार्य में अन्य सरकारी कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। साथ ही, सर्वेक्षण के लिए ऑनलाइन विकल्प भी उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कोई भी कर सकता है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 अक्टूबर तक सर्वेक्षण पूरी तरह समाप्त कर लिया जाएगा और सभी समुदायों के लोगों से अनुरोध किया कि वे इसमें भाग लें।
इस सर्वेक्षण की अनुमानित लागत 420 करोड़ रुपये थी और इसे राज्य के सामाजिक-शैक्षिक सुधार और पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








