पुणे। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रदूत और डॉ. विक्रम साराभाई के घनिष्ठ सहयोगी, प्रसिद्ध वैज्ञानिक एकनाथ वसंत चिटनिस का बुधवार को पुणे में निधन हो गया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि डॉ. चिटनिस जुलाई में 100 वर्ष के हुए थे और पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। बुधवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा।
डॉ. चिटनिस भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के शुरुआती दौर के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने 1962 में भारत के पहले रॉकेट प्रक्षेपण स्थल के रूप में केरल के थुम्बा को चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी वर्ष, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और डॉ. साराभाई के साथ उनकी मौजूदगी में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी गई और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना हुई, जो बाद में इसरो में परिवर्तित हुई।
डॉ. चिटनिस ने विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (INSAT) कार्यक्रम की शुरुआत और सुदूर संवेदन अनुप्रयोगों तथा अंतरिक्ष-आधारित संचार परियोजनाओं की स्थापना में भूमिका निभाई। इस पहल ने ग्रामीण भारत में दूरसंचार और शैक्षिक प्रसारण के माध्यम से शिक्षा पहुंचाने में क्रांति ला दी। उनका योगदान ‘सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट’ (SITE) के जरिए 2,400 गांवों तक शिक्षा पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण रहा।
1981 से 1985 तक उन्होंने अहमदाबाद स्थित इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) के निदेशक के रूप में कार्य किया और युवा प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें निखारा। डॉ. चिटनिस ने विशेष रूप से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मार्गदर्शन किया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नामांकित करवाया।
डॉ. चिटनिस को 1985 में उनके विज्ञान और राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद वे पुणे में सक्रिय रहे और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SSPU) में शैक्षिक मल्टीमीडिया अनुसंधान केंद्र (EMRC) की स्थापना में योगदान दिया।
डॉ. चिटनिस के परिवार में उनके पुत्र डॉ. चेतन चिटनिस, पुत्रवधू अमिका और पोतियां तारिणी व चांदिनी हैं। डॉ. चेतन चिटनिस पेरिस के पाश्चर संस्थान में मलेरिया अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
विज्ञान जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। डॉ. चिटनिस न केवल एक वैज्ञानिक थे, बल्कि अनेक पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक भी थे। उनके योगदान की यादें भारतीय अंतरिक्ष और शिक्षा जगत में सदैव जीवित रहेंगी।








