लोकवाहिनी , संवाददाता:मुंबई। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने आदेश दिया कि राज्य में तेंदुओं द्वारा मानव हमलों की समस्या को राज्य आपदा घोषित करने का प्रस्ताव अगली कैबिनेट बैठक में पेश किया जाना चाहिए। साथ ही तेंदुओं को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 से बाहर कर अनुसूची-2 में शामिल करने का प्रस्ताव भी तैयार कर प्रस्तुत किया जाये। इंसानों पर हमला करने वाले तेंदुओं पर नियंत्रण के लिए आवश्यक स्थानों पर तत्काल पिंजरे लगाए जाएं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को अगले दो से तीन महीनों में पुणे जिले में तेंदुओं के उपचार और पुनर्वास के लिए दो बचाव केंद्र शुरू करने का भी निर्देश दिया।
इंसानों पर तेंदुए के हमले की समस्या को राज्य आपदा घोषित करने का प्रस्ताव अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। साथ ही तेंदुओं को अनुसूची एक से हटाकर अनुसूची दो में शामिल करने के संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाये। तेंदुओं को मनुष्यों पर हमला करने से रोकने के लिए जहां तत्काल आवश्यकता हो वहां पिंजरे उपलब्ध कराए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने अगले दो से तीन महीनों में पुणे जिले में तेंदुओं के लिए दो बचाव केंद्र शुरू करने का निर्देश दिया। प्रदेश में तेंदुओं की समस्या को लेकर आज मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, वन मंत्री गणेश नाइक, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, विधायक शरद सोनवणे, पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल, मुख्य सचिव राजेश कुमार, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, राहत और पुनर्वास विभाग की प्रमुख सचिव विनीता वैद सिंघल, राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल के प्रमुख) एम श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीनिवास रेड्डी, पुणे कलेक्टर जितेंद्र डुड्डी और अन्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में तेंदुए के हमले बढ़े हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए समयबद्ध तरीके से तात्कालिक और दीर्घकालिक दो तरह से उपाय किए जाने चाहिए। आपातकालीन उपायों में गाँवों और कस्बों के पास तेंदुओं को ढूँढना और उन्हें पकड़ना शामिल है। इसके लिए ड्रोन की मदद लें।
तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे, वाहन, जनशक्ति आदि आवश्यक सामग्री के लिए ज़िला योजना समिति से धनराशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही दीर्घकालिक समाधान के तौर पर तेंदुओं की नसबंदी की जानी चाहिए। साथ ही, पकड़े गए नरभक्षी तेंदुओं को रखने के लिए पुणे ज़िले में दो बचाव केंद्र स्थापित करने के लिए जगह खोजने की योजना तुरंत बनाई जानी चाहिए। साथ ही गोरेवाड़ा और अन्य स्थानों पर मौजूदा बचाव केंद्रों की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए। तेंदुए की अनुसूची एक में शामिल किया गया है। इसलिए, नरभक्षी तेंदुओं को पकड़ने और मारने की सीमाएँ हैं। इसलिए तेंदुओं को शेड्यूल वन से हटाने के संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए। तेंदुओं की नसबंदी की अनुमति केंद्र सरकार से मिल गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदमखोर तेंदुओं को ढूँढ़कर उनकी नसबंदी की जाए। इस मौके पर फडणवीस ने उक्त बातें कहीं।










