ओबीसी आंदोलन मामला – नितेश राणे और अन्य आरोपी अनुपस्थित
सिंधुदुर्ग से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। कुडाळ न्यायालय ने राज्य के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे और अन्य आमदारों के खिलाफ जमानत योग्य गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह वारंट उन नेताओं पर संविधान बचाव आंदोलन में शामिल होने के आरोपों के सिलसिले में जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार, नितेश राणे, प्रविण दरेकर और प्रसाद लाड ने न्यायालय के समक्ष पेश नहीं होने की वजह से आज की सुनवाई में अपनी गैरमौजूदगी दर्ज कराई। 26 जून 2021 को सिंधुदुर्ग जिले में हुए ओबीसी आंदोलन के दौरान उनके शामिल होने पर कुडाळ पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया गया था।
आज की सुनवाई में कुछ आमदार जैसे निलेश राणे और राजन तेली उपस्थित थे, जबकि नितेश राणे और अन्य पांच आरोपी अनुपस्थित रहे। नितेश राणे की अनुपस्थिति के चलते कोर्ट ने वकील की माफी अर्ज को नकारते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और समर्थक दोनों ही इस मामले को लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। नितेश राणे पर कार्रवाई और उनकी गैरमौजूदगी ने चुनावी राजनीति और पार्टी की रणनीतियों पर भी असर डालने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला न केवल सिंधुदुर्ग की राजनीति को हिला सकता है, बल्कि राज्य स्तर पर भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। जनता और मीडिया की नजरें अब इस मामले की आगे की सुनवाई और गिरफ्तारी वारंट पर टिकी हुई हैं।











