नागपुर। महापालिका चुनावों में राजनीतिक घटनाक्रम तेज हो गया है। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच गठबंधन और साझेदारी को लेकर बैठकें शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के भी नागपुर महापालिका में महाविकास आघाडी के रूप में चुनाव लड़ने की संभावना है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अलावा, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), वंचित बहुजन आघाडी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) भी शामिल होंगी और 32 सीटों पर आम सहमति बनने की संभावना है।
कांग्रेस पिछले तीन नागपुर महापालिका चुनावों में सत्ता हासिल करने में असफल रही है। पिछले चुनाव में उसके पार्षदों की संख्या 29 थी। हालांकि, लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन विधानसभा चुनावों में दो सीटों को छोड़कर कांग्रेस अपनी सीटें नहीं बढ़ा सकी। इस बार देखा गया कि मतदान विभाजन से कांग्रेस को नुकसान हुआ।
अतः अब कांग्रेस ने महापालिका चुनावों में मतदान विभाजन से बचने के लिए समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करने हेतु बैठकों का सत्र शुरू कर दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस रिपब्लिकन, वंचित आघाडी और शिवसेना को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है। इसलिए, कांग्रेस आगामी नगर निगम चुनावों में प्रभावशाली पार्टियों को 32 टिकट देने के लिए तैयार है। इनमें से 10 से 12 सीटें शिवसेना (यूबीटी) समूह को और 18 सीटें अन्य पार्टियों को दिए जाने की संभावना है।
कांग्रेस शेष सीटों पर अपने चिन्हों पर उम्मीदवार उतारेगी। मुंबई में पिछले तीन दिनों से इस संबंध में चर्चा चल रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय आज या कल यानी 30 दिसंबर को घोषित किया जाएगा।
क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी? राज्य भर में यह चर्चा है कि दोनों राष्ट्रवादी गठबंधन करेंगे। इसका असर महाविकास आघाडी पर भी पड़ने की संभावना है। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार समूह) को सीट आवंटन से बाहर रखा है। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि नागपुर महापालिका में राकांपा (शरद पवार) स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी, क्योंकि एनसीपी के पास 32 सीटों में से एक भी सीट नहीं है। दूसरी ओर, भाजपा द्वारा एनसीपी (अजीत पवार समूह) के साथ गठबंधन की संभावना भी कम ही है।








