मराठी अस्मिता और गठबंधन जैसे मुद्दों पर गरमाई सियासत, 3.48 करोड़ मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे
लोकवाहिनी, संवाददाता मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे अंतराल के बाद हो रहे नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। 13 जनवरी 2026, मंगलवार को 6 बजते ही प्रचार थम गया। हालांकि उम्मीदवार बिना माइक्रोफोन के डोर-टू-डोर कैंपेनिंग कर सकते हैं। इस दौरान उनके साथ भीड़ प्रतिबंधित है। 15 जनवरी 2026, गुरुवार को राज्य के 29 नगर निगमों में एक साथ मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को मतगणना होगी। इन चुनावों को न सिर्फ स्थानीय निकाय चुनाव के तौर पर देखा जा रहा है बल्कि कई दलों का अस्तित्व दांव पर लगा है। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
मराठी अस्मिता, गठबंधन की मजबूती और बीएमसी की किस्मत कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियां चुनावी रण में अपनी-अपनी दावेदारी प्रबल बताने में लगी रही। इन 29 नगर निगमों में कुल 893 वार्ड हैं, जिनके जरिए 2,800 से अधिक पार्षदों का चुनाव होना है। सबसे ज्यादा ध्यान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर टिका हुआ है, जो देश का सबसे बड़ा नगर निगम है और जिसका सालाना बजट कई राज्यों से भी ज्यादा है। महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में एक साथ चुनाव हो रहे हैं, जिनमें लगभग 3.48 करोड़ मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
जिन महानगरपालिकाओं में मतदान होना है उनमें – बृहन्मुंबई महानगरपालिका, ठाणे महानगरपालिका, नवी मुंबई महानगरपालिका, उल्हासनगर महानगरपालिका, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका, भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका, मीरा-भायंदर महानगरपालिका, वसई-विरार सिटी महानगरपालिका, पनवेल महानगरपालिका, नासिक महानगरपालिका, मालेगांव महानगरपालिका, अहिल्यानगर (अहमदनगर) महानगरपालिका, जलगांव महानगरपालिका, धुले महानगरपालिका, पुणे महानगरपालिका, पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका, सोलापुर महानगरपालिका, कोल्हापुर महानगरपालिका, इचलकरंजी महानगरपालिका, सांगली-मिरज-कुपवाड़ महानगरपालिका, छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका, नांदेड़-वाघाला महानगरपालिका, परभणी महानगरपालिका, जालना महानगरपालिका, लातूर महानगरपालिका, अमरावती महानगरपालिका, अकोला महानगरपालिका और चंद्रपुर महानगरपालिका शामिल हैं।






