बनावट दस्तावेजों पर नौकरी पाने वाले शिक्षक और प्रधानाध्यापक गिरफ्तार
शहर के सदर पुलिस थाने में शालेय विभाग से जुड़े एक बड़े घोटाले के मामले में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। यह मामला मार्च–मई 2025 के दौरान दर्ज किया गया था। जांच के दौरान मुख्य आरोपी के घर की तलाशी में कई फर्जी और बोगस दस्तावेज बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने आगे की जांच शुरू की, जिसमें अब तक कुल सत्रह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस प्रकरण में प्राथमिक आरोपपत्र भी न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है।
आगे की जांच के दौरान मुख्य आरोपी के घर से गोंदिया जिले के ठाणे गांव स्थित सिद्धार्थ हाईस्कूल एवं जूनियर कॉलेज से जुड़े दो शिक्षकों – दिलेश कुमार कटरे और रूपाली रांगडाले – के फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए। शालेय विभाग के विभिन्न कार्यालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन दोनों शिक्षकों ने जाली दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रस्ताव दाखिल किए थे, जिसके आधार पर उन्हें नियुक्ति मिली थी। इसी वजह से उन्हें भी इस अपराध में आरोपी बनाया गया।
इन आरोपियों ने सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं, लेकिन पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों के आधार पर उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
इस मामले में तीसरे आरोपी भाऊराव मधुकर मालदे हैं, जो सिद्धार्थ हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि उन्होंने फर्जी प्रस्तावों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति को आगे बढ़ाया और शालार्थ आईडी प्राप्त करने के लिए उपसंचालक कार्यालय में अपने हस्ताक्षर से प्रस्ताव भेजा। इस कारण उनका भी अपराध में सीधा सहभाग पाया गया।
तीनों आरोपियों को गोंदिया जिले के ठाणे गांव से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिनों की पुलिस कस्टडी दी गई है। पुलिस को आशंका है कि इस घोटाले में शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी, शिक्षक और संस्थाचालक भी शामिल हो सकते हैं, जिसकी जांच जारी है। इस पूरी कार्रवाई में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और विशेष टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।












