साहित्यिक धरोहर में पंपिंग केंद्र निर्माण से नागरिकों में असंतोष
विकास और विरासत के बीच संतुलन की उठी मांग
आज राज्य भर में मराठी भाषा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। इसी अवसर पर यहां चौथे विश्व मराठी परिषद का भव्य उद्घाटन मुख्यमंत्री तथा दोनों उपमुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में आयोजित किया जा रहा है। साहित्य, संस्कृति और भाषा के गौरव को समर्पित इस आयोजन को लेकर शहर में विशेष उत्साह का वातावरण है।
इस बीच हनुमानवाड़ी क्षेत्र स्थित कुसुमाग्रज काव्य उद्यान विवादों के घेरे में आ गया है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार कुसुमाग्रज के नाम पर निर्मित इस उद्यान में नगर निगम द्वारा जलनिकासी पंपिंग केंद्र स्थापित करने का कार्य आरंभ कर दिया गया है। इस निर्णय के कारण साहित्य प्रेमियों तथा स्थानीय नागरिकों में असंतोष व्याप्त है।
पंचवटी क्षेत्र में गोदावरी तट पर निर्मित यह काव्य उद्यान वर्ष 1999 में तत्कालीन पार्षद गुरुमीत बग्गा की परिकल्पना से विकसित किया गया था। यहां कुसुमाग्रज की चयनित कविताओं के शिलालेख, हरित परिवेश तथा साहित्यिक विरासत का प्रतीकात्मक स्वरूप विद्यमान है। अब कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में यहां से जल पंप कर तपोवन स्थित शोधन केंद्र तक भेजने की योजना बनाई गई है।
उद्यान परिसर में वृक्षों की कटाई किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि साहित्यिक धरोहर के रूप में स्थापित इस स्थल की मूल भावना को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। प्रशासनिक आवश्यकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने की मांग जोर पकड़ रही है।








