नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग (EC) ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित गलत सूचना का प्रचार गंभीर खतरा है। आयोग ने शुक्रवार को दलों को परामर्श जारी करते हुए कहा कि शिकायत मिलने पर AI से तैयार की गई सामग्री तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है।
आयोग ने यह निर्देश उन शिकायतों के बीच जारी किया जिनमें दलों ने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी AI उपकरणों का दुरुपयोग करके गलत सूचना फैला रहे हैं। आयोग ने बताया कि चुनावी क्षेत्र में नेताओं को AI का उपयोग करके संवेदनशील संदेश देते दिखाना “समान अवसर” की भावना को प्रभावित करता है।
चुनाव आयोग ने अपने पिछले दिशानिर्देशों और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी AI-निर्मित फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट लेबल होना चाहिए, जैसे ‘AI-Generated’, ‘AI Enhanced’, या ‘कृत्रिम सामग्री’। वीडियो में यह लेबल स्क्रीन के कम से कम 10% हिस्से में ऊपरी भाग में और ऑडियो में शुरुआत के 10% हिस्से में दिखना चाहिए।
यदि AI सामग्री चुनाव प्रचार में उपयोग हो रही है, तो इसे बनाने वाले का नाम मेटाडेटा या कैप्शन में दर्ज करना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करेगा कि वोटर यह पहचान सकें कि सामने दिखाया गया कंटेंट भरोसेमंद है या नहीं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि गलत सूचना फैलाने वाली AI सामग्री, चाहे वह फोटो, ऑडियो या वीडियो हो, तीन घंटे के भीतर हटा दी जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह एडवाइजरी 6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले लागू है और इसे संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत जारी किया गया है।
निर्वाचन आयोग ने यह कदम पिछले साल और इस साल जनवरी में जारी दिशा-निर्देशों की पुनरावृत्ति के रूप में उठाया है, ताकि AI का सही और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।











