नयी दिल्ली। चार दिवसीय छठ महापर्व का आज उगते सूर्य को अर्घ्य देकर विधिवत समापन हो गया। देशभर के घाटों पर लाखों श्रद्धालु सुबह-सुबह ही पहुंचकर सूर्यदेव की अंतिम पूजा में शामिल हुए। सामाजिक एकजुटता और परिवार के कल्याण की भावना से भरे इस अनुष्ठान में भक्तों ने छठी मइया से सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि भगवान सूर्यदेव को प्रात:कालीन अर्घ्य के साथ आज महापर्व छठ का पावन समापन हुआ। चार दिवसीय इस अनुष्ठान में छठ पूजा की भव्य परंपरा के दिव्य दर्शन हुए हैं। प्रधानमंत्री ने सभी व्रती भक्तों, श्रद्धालुओं और पर्व का हिस्सा बने परिवारजनों का हृदय से अभिनंदन किया। उन्होंने कामना की कि छठी मइया की असीम कृपा सभी के जीवन को सदैव प्रकाशमान बनाए रखे।
सुबह के अर्घ्य के दौरान देश के अनेक राज्यों में आस्था का विराट स्वरूप देखने को मिला। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड से लेकर दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ तक हजारों की संख्या में लोग नदियों, तालाबों और घाटों पर जुटे। पूजा-अर्चना के दौरान भजनों और मंत्रोच्चार की गूंज से आस-पास का वातावरण भक्तिमय हो गया। बिहार और पूर्वांचल के क्षेत्रों में गंगा घाटों पर विशेष भीड़ उमड़ी, वहीं दिल्ली के यमुना किनारे स्थित हाथी घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वाराणसी के विभिन्न घाटों पर तो भोर होते ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
पूरे अनुष्ठान के दौरान प्रशासन की ओर से प्रमुख घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। स्वच्छता और जल-स्तर की निगरानी के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना न हो।
यह सूर्योपासना पर आधारित पर्व 25 अक्टूबर को नहाय-खाय की विधि के साथ आरंभ हुआ था। इसके बाद 26 अक्टूबर को खरना, 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य और अंत में 28 अक्टूबर को उषा अर्घ्य के साथ यह महापर्व संपन्न हुआ। कठोर व्रत, शुचिता और निष्ठा पर आधारित छठ पूजा भारतीय संस्कृति की सबसे अनुशासित और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि छठी मइया संतान की रक्षा करती हैं और परिवार में सुख, समृद्धि तथा स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में बसे भारतीय समुदायों ने भी पुरखों की इस परंपरा को पूरे उत्साह के साथ निभाया। सोशल मीडिया पर श्रद्धा और आस्था से भरे दृश्यों की भरमार रही, जिसने इस पावन पर्व को वैश्विक पहचान दिलाने का काम किया।











