पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए भाकपा (माले) लिबरेशन ने शनिवार को 20 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। पार्टी ने अपने सभी 12 मौजूदा विधायकों को पुनः टिकट देकर यह संदेश दिया कि संगठन अपनी जमीनी पकड़ और पहचान बनाए रखना चाहता है।
पार्टी ने उन सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे हैं, जहां पिछली बार जीत नहीं मिली थी। 2020 में भाकपा (माले) ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 सीटों पर जीत हासिल की थी।
भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा, “हमने गठबंधन की भावना बनाए रखी है। हमारी इच्छा थी कि इस बार कम से कम 24 सीटों पर चुनाव लड़ें, लेकिन 20 सीटों तक ही सीमित रहना पड़ा। महागठबंधन इस बार भारी बहुमत से जीत हासिल करेगा, क्योंकि जनता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से ऊब चुकी है।”
मुख्य उम्मीदवार और जातीय प्रतिनिधित्व
भाकपा (माले) की सूची में 6 उम्मीदवार अनुसूचित जाति (SC), 10 ओबीसी और 2 ईबीसी समुदाय से हैं। पुराने विधायकों में अमरजीत कुशवाहा, सत्यदेव राम, गोपाल रविदास, संदीप सौरभ, शिव प्रकाश रंजन, अजीत कुमार सिंह, बिरेंद्र प्रसाद और महबूब आलम शामिल हैं।
नए और चर्चित नामों में धनंजय, पूर्व JNU छात्रसंघ अध्यक्ष, भोरे विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार हैं। धनंजय 27 साल बाद किसी दलित उम्मीदवार के तौर पर JNU छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे और लंबे समय से सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
महिला और शिक्षित उम्मीदवारों को भी मौका:
पटना की दीघा विधानसभा सीट से असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्या गौतम को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा फुलवारी, पालीगंज, राजगीर और वारिसनगर जैसी सीटों पर भी नए, शिक्षित और सामाजिक रूप से सक्रिय उम्मीदवार मैदान में हैं।
पुराने गढ़ों में भरोसा और रणनीति
भाकपा माले ने अपने परंपरागत मजबूत इलाकों—आरा, तरारी, अगिआंव, अरवल, डुमरांव और फुलवारी—में पुराने नेताओं को दोबारा मैदान में उतारा। पार्टी का लक्ष्य नए क्षेत्रों में प्रयोग करने से पहले अपने पुराने गढ़ों को सुरक्षित रखना है।
भाकपा माले भले ही मुख्यधारा की राजनीति में सीमित ताकत है, लेकिन INDIA गठबंधन में उसकी भूमिका अहम मानी जाती है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में उसका स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा रहा है। माले की ताकत वोट प्रतिशत में नहीं, बल्कि संगठनात्मक गहराई और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता में है।
दलित–पिछड़े वर्ग पर फोकस और परंपरागत जनाधार
भाकपा माले की 20 उम्मीदवारों की सूची स्पष्ट करती है कि पार्टी परंपरागत जनाधार और जातीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रही है। दलित और पिछड़े वर्गों पर फोकस, शिक्षित उम्मीदवारों की भागीदारी और पुराने चेहरों पर भरोसा उसकी राजनीतिक रणनीति को दिखाता है।
राज्य की 243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी।
भाकपा माले की 20 उम्मीदवारों की सूची (मुख्य सीट और प्रत्याशी)












