नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन किया और देशवासियों से “एक सशक्त, समरस और उत्कृष्ट भारत” के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरदार पटेल ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और संगठन क्षमता से भारत के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी।
“पटेल के संकल्प से ही भारत हुआ एकजुट” — राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा —
“लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मैं सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। वे एक महान देशभक्त, दूरदर्शी नेता और राष्ट्र निर्माता थे, जिन्होंने अपने अटूट संकल्प और साहस से भारत को एकसूत्र में बांधने का ऐतिहासिक कार्य किया।”
उन्होंने आगे कहा कि सरदार पटेल की कर्मनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की भावना हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
“आइए, राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर हम सब एकजुट होकर एक सशक्त, समरस और श्रेष्ठ भारत के निर्माण का संकल्प लें,” राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा।
राष्ट्रपति भवन में श्रद्धांजलि समारोह
सुबह राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य अतिथि और राष्ट्रपति सचिवालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय एकता की शपथ भी ली गई, जिसमें सभी ने देश की अखंडता और विविधता को बनाए रखने का संकल्प दोहराया।
देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरदार पटेल चौक पर पुष्प अर्पित किए।
अमित शाह ने कहा कि “सरदार पटेल ने भारत को जोड़ा, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के मार्ग पर अग्रसर कर रहे हैं।”
लौह पुरुष पटेल की विरासत
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाद में जन्मे सरदार पटेल ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने 562 रियासतों को भारत संघ में मिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया, जिसके लिए उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा गया।
उनकी जयंती को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि हर नागरिक एकता, अखंडता और समरसता के मूल्यों को याद रख सके।
“एकता में ही भारत की शक्ति है”
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि आज भारत तेज़ी से विकास के मार्ग पर अग्रसर है और इसे बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय एकता सबसे आवश्यक है।
उन्होंने कहा —
“जब देश के नागरिक एक दिशा में सोचते और काम करते हैं, तभी भारत अपनी वैश्विक भूमिका को सशक्त कर सकता है। यही सरदार पटेल की सबसे बड़ी सीख है।”









