मुंबई। भारत की समुद्री नीतियों को नए मोड़ पर ले जाने की तैयारी हो रही है। मुंबई में शुरू हुए इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और व्यापारिक संतुलन की प्रमुख धुरी बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि 5 अरब अमेरिकी डॉलर की ‘ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना’ देश के समुद्री व्यापार को “कई गुना” बढ़ा देगी और भारत जल्द ही वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में उभरेगा।
ग्रेट निकोबार — भारत की सामुद्रिक रणनीति का भविष्य?
शाह ने अपने भाषण में कहा कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना, जो 2021 में शुरू हुई, न सिर्फ लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारत को मजबूत स्थिति में खड़ा करेगी।
यह परियोजना बंगाल की खाड़ी में भारत की मैरिटाइम मौजूदगी को विस्तार देने का बड़ा कदम मानी जा रही है।
सरकार इसे भारत की ब्लू इकोनॉमी के परिवर्तनकारी इंजन के रूप में देख रही है।
“भारत प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग में विश्वास रखता है”
शाह ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये के अवसर मौजूद हैं।
सरकार का लक्ष्य है —
-शिप बिल्डिंग में दुनिया के शीर्ष 5 देशों में शामिल होना
-बंदरगाह क्षमता को तीन गुना बढ़ाकर 10,000 MMTPA तक ले जाना
उन्होंने दावा किया कि 10 अरब डॉलर की लागत से बन रहा वधावन पोर्ट, बनते ही दुनिया के टॉप 10 पोर्ट्स में शामिल हो जाएगा।
“हम एक नया समुद्री इतिहास रचने के कगार पर हैं। गेटवे ऑफ इंडिया जल्द ही गेटवे ऑफ वर्ल्ड बनेगा।”- अमित शाह
सुरक्षा व स्थिरता से बढ़ा निवेश
इसी कार्यक्रम में केंद्रीय पोत, परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत में सुरक्षा और कानून व्यवस्था में सुधार के चलते विदेशी निवेश तेज़ी से बढ़ा है।
उन्होंने दावा किया —
- 350+ विदेशी वक्ता कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं
- 11 से अधिक देशों के मंत्री मौजूद
- 680 निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे
- कुल निवेश राशि 10 लाख करोड़ रुपये+
- इससे 7 लाख नए रोजगार सृजित होंगे
“युवाओं की भागीदारी से बदलेगा समुद्री क्षेत्र”
सोनोवाल ने कहा कि पीएम मोदी के विज़न ने पोर्ट इकोसिस्टम, शिपबिल्डिंग और रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री को नई दिशा दी है।
उनके अनुसार —
- नाविकों की संख्या 150% बढ़ी
- माल ढुलाई क्षमता में 400% का इजाफ़ा
- परियोजनाओं के आवंटन में 100% वृद्धि
उन्होंने भविष्यवाणी की कि भारत 2047 तक शिपबिल्डिंग में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल होगा।
सवाल भी कायम…
जहाँ सरकार इसे भारत की सामुद्रिक शक्ति का नया अध्याय मान रही है, वहीं ग्रेट निकोबार परियोजना पर पर्यावरणीय और स्थानीय समुदायों के अधिकार से जुड़े सवाल लगातार उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस द्वीप का पारिस्थितिक संतुलन बेहद नाज़ुक है और बड़े पैमाने के निर्माण से वन्य जीवन व शोंपेन जनजाति पर खतरा बढ़ सकता है। लेकिन सरकार का तर्क है विकास और सुरक्षा — दोनों साथ-साथ संभव हैं।









