राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी के प्रशिक्षण का 78वां बैच राष्ट्रपति की उपस्थिति में संपन्न
लोकवाहिनी, संवाददातानागपुर। “विनम्रता, धैर्य और संवेदनशीलता आदर्श कार्यप्रणाली के अभिन्न अंग हैं। अधिकारी होने के नाते, हमारा दायित्व केवल नियमों का पालन कराना ही नहीं, बल्कि प्रशासन में जनता का विश्वास मजबूत करना भी है। न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी के आधार पर लिए गए निर्णय शासन प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ देश के समग्र विकास में योगदान देते हैं।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी के अधिकारियों को संबोधित करते हुए और उन्हें भविष्य के लिए दिशा-निर्देश देते हुए यह बात कही।
वह राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (NADT) के 78वें बैच के दीक्षांत समारोह में बोल रही थीं। एनएडीटी सभागार में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष रवि अग्रवाल, महानिदेशक सी.बी.एन.के. मैथ्यू, प्रशासनिक सदस्य पंकज कुमार मिश्रा उपस्थित थे।
राष्ट्रपति ने कहा, “आप देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और सुशासन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। आने वाले दिनों में हमें डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की जटिलता और कर चोरी के नए तरीकों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हमारी क्षमताओं को और मजबूत करेंगे; लेकिन प्रौद्योगिकी केवल एक साधन है।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि अधिकारियों को हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारी सच्ची पहचान हमारी अंतरात्मा, ईमानदारी और नैतिक दृष्टिकोण में निहित है। भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार वृद्धि हो रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है। आयकर अधिनियम, 2025, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है, हमारी कर प्रणाली को आधुनिक, सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में अग्रसर है।
विकसित भारत में योगदान दें: राज्यपाल
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में महिला अधिकारियों की संख्या में वृद्धि होना एक सुखद संकेत है। आज भारत विश्व नेतृत्व की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में आपको राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर मिला है।
व्यापक जनहित को ध्यान में रखना आवश्यक: राष्ट्रपति
सरकारी अधिकारी के रूप में निर्णय लेते समय व्यापक जनहित को ध्यान में रखना आवश्यक है। राज्य राजस्व मंत्री और पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में भारतीय राजस्व सेवा विभाग और उसके अधिकारियों की जिम्मेदारी निःसंदेह महत्वपूर्ण है। हमारी अर्थव्यवस्था प्रगति के परिवर्तन के केंद्र में है और उसे सुदृढ़ करने में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।









