अंबाला। देश की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को भारतीय वायुसेना की सबसे आधुनिक और शक्तिशाली राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर एक नया इतिहास रच दिया। हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन से पूर्वाह्न 11:27 बजे उड़ान भरते हुए राष्ट्रपति करीब 30 मिनट तक आसमान में रहीं और लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय की। उड़ान के दौरान राफेल ने समुद्र तल से 15,000 फुट की ऊंचाई और करीब 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की।
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस ऐतिहासिक उड़ान को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि इस अनुभव ने देश की रक्षा शक्ति के प्रति उनके मन में गर्व की नई भावना जगा दी है। विज़िटर बुक में लिखे संदेश में उन्होंने अंबाला वायुसेना स्टेशन और भारतीय वायुसेना की टीम को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। राष्ट्रपति भवन के अनुसार यह उड़ान 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज़’ के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी के नेतृत्व में पूरी की गई।
भारत की पहली राष्ट्रपति बनकर जिन्होंने दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों राफेल और सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी है, राष्ट्रपति मुर्मू ने इससे पहले अप्रैल 2023 में तेजपुर एयरबेस से सुखोई में उड़ान भरी थी। इससे पहले डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई में उड़ान भरकर इतिहास रचा था, लेकिन राफेल में यह उपलब्धि केवल मुर्मू ही हासिल कर सकी हैं।
उड़ान से पहले राष्ट्रपति ने ‘जी-सूट’ पहनकर, हेलमेट हाथ में लिए और धूप का चश्मा लगाए पायलट के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। एयरबेस पहुंचने पर उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी प्रदान किया गया। इस दौरान एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने भी एक अलग राफेल विमान में उड़ान भरी।
गौरतलब है कि फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल विमानों को सितंबर 2020 में अंबाला एयरबेस पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। इन्हीं विमानों ने हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ढांचों को तबाह करने वाली सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रपति की यह रोमांचक उड़ान केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारत की रक्षा क्षमता मज़बूत हाथों में है और राष्ट्र हर मोर्चे पर पूरी शक्ति के साथ खड़ा है।











