मुंबई। निर्देशक-निर्माता राम गोपाल वर्मा का कहना है कि आज बनने वाली कई अखिल भारतीय (Pan India) फिल्में दर्शकों को बांधे रखने वाली कहानी से ज्यादा बड़े सेट, स्टंट और विज़ुअल्स पर ध्यान दे रही हैं। वर्मा अपनी चर्चित फिल्म ‘सिवा’ और उसके हिंदी संस्करण ‘शिवा’ को अगले महीने सिनेमाघरों में फिर रिलीज कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह फिल्म आज भी प्रासंगिक है क्योंकि इसमें नायक को एक साधारण इंसान के रूप में दिखाया गया है, जो परिस्थितियों से लड़ता है और खुद को साबित करता है।
फिल्म ‘शिवा’ में नागार्जुन ने एक कॉलेज छात्र का किरदार निभाया था, जो गुंडों, नेताओं और भ्रष्ट छात्र राजनीति के गठजोड़ के खिलाफ खड़ा होता है। वर्मा ने कहा कि आज कई फिल्में दर्शकों को प्रभावित करने के प्रयास में कहानी की विश्वसनीयता को हाशिये पर डाल रही हैं। उनके मुताबिक निर्माताओं का पूरा जोर लोकेशन, सेट्स और एक्शन सीक्वेंस जैसे निर्माण संबंधी पहलुओं को दिखाने पर रहता है, जबकि कहानी और किरदार की भावनाएं कमजोर पड़ जाती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘शिवा’ का एक मशहूर दृश्य, जिसमें नागार्जुन साइकिल की चेन निकालकर गुंडों से भिड़ जाते हैं, आज भी लोगों की यादों में ताजा है। यह किसी महंगे सेट या तेज संगीत का नहीं, बल्कि एक सामान्य इंसान की मजबूरी और हिम्मत का प्रभाव है जो दर्शकों को जोड़ता है। वर्मा का मानना है कि आज की ज्यादातर मसाला फिल्मों में नायक पहले ही दृश्य से सुपरहीरो दिखाया जाता है, जिससे कहानी की रोचकता खत्म हो जाती है क्योंकि दर्शक को पहले से ही पता होता है कि नायक हर हाल में जीत जाएगा।
राम गोपाल वर्मा ने कहा कि ‘शिवा’ जैसा किरदार किसी भी तरह की संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि में फिट बैठ सकता है — चाहे कॉलेज का माहौल हो, यूनियनों का जगत हो या फिर अंडरवर्ल्ड। नायक की मजबूती उसके एलीवेशन शॉट्स से नहीं बल्कि उस डर और चुनौती से उत्पन्न होती है जिसे वह पीछे छोड़ देता है। इसलिए यह फिल्म अपनी रिलीज के दशकों बाद भी लोगों के दिल में जगह बनाए हुए है।
वर्मा ने बताया कि उन्होंने कॉलेज खत्म करने के ठीक बाद यह फिल्म बनाई थी और इसमें कई दृश्य तथा किरदार उनकी वास्तविक जिंदगी में देखे गए अनुभवों पर आधारित थे। यह भी कारण है कि लोग कहानी से तुरंत जुड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह सनी देओल की ‘अर्जुन’, ब्रूस ली की ‘द वे ऑफ द ड्रैगन’ और फिल्म ‘द फाउंटेनहेड’ से प्रेरित रहे हैं, जिसका प्रभाव ‘शिवा’ में साफ दिखता है।
उन्होंने बताया कि यह री-रिलीज किसी सामान्य स्क्रीनिंग की तरह नहीं है, बल्कि दिवंगत दिग्गज अभिनेता और नागार्जुन के पिता अक्किनेनी नागेश्वर राव (ANR) की 101वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि के रूप में की जा रही है। साथ ही यह अन्नपूर्णा स्टूडियोज की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का भी जश्न है। फिल्म में नागार्जुन की पत्नी अमला, रघुवरन और जे.डी. चक्रवर्ती जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएँ निभाई थीं। जे.डी. चक्रवर्ती बाद में वर्मा की बहुचर्चित फिल्म ‘सत्या’ के नायक के रूप में नजर आए थे।
राम गोपाल वर्मा ने स्पष्ट कहा कि सिनेमा का वास्तविक प्रभाव तामझाम में नहीं, बल्कि कहानी और किरदारों की सच्चाई में होता है। उनकी मान्यता है कि यदि फिल्म की आत्मा मजबूत हो तो वह समय की परीक्षा पर खरी उतर सकती है और ‘शिवा’ इसी का उदाहरण है।








