नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से जारी शिवसेना के “धनुष-बाण” चुनाव चिह्न विवाद पर अब अंतिम फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर 12 नवंबर से अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है। जरूरत पड़ने पर अदालत 13 नवंबर को भी सुनवाई जारी रखेगी।
मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश पारित किया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव जनवरी 2026 में प्रस्तावित हैं, इसलिए अदालत को निर्णय से पहले मामले को निपटाना चाहिए।
पीठ ने कहा,
“हम 12 नवंबर को सभी पक्षों को सुनेंगे और आवश्यकता पड़ी तो 13 नवंबर को भी सुनवाई जारी रहेगी।”
शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और नीरज किशन कौल ने अपनी दलीलें पेश कीं।
इससे पहले 14 जुलाई को शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह मामला लंबे समय से लंबित है और अनिश्चितता को अब और नहीं बढ़ने दिया जा सकता।
उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि 2023 में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा शिंदे गुट को पार्टी का चुनाव चिह्न सौंपने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के निर्देशों के विपरीत था। गुट ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें 10 जनवरी 2024 को शिंदे समेत 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिका खारिज कर दी गई थी।
याचिका में कहा गया कि विधानसभा अध्यक्ष ने “दलबदल करने वालों को दंडित करने के बजाय पुरस्कृत कर दिया”, जिससे लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ठेस पहुंची है।
अध्यक्ष के फैसले से शिंदे की स्थिति और मजबूत हुई, जिसने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन भाजपा, शिंदे गुट और अजित पवार की एनसीपी को एकजुट बनाए रखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल शिवसेना के भविष्य को तय करेगा, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत की दिशा भी बदल सकता है।









