दोहा। भारत सरकार अब बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) कानूनों में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि मंत्रालय जल्द ही इस विषय पर परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी करेगा, ताकि देश में नवाचार, अनुसंधान और विकास (R&D) को और प्रोत्साहन दिया जा सके।
गोयल ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में ऐसे किसी भी प्रावधान को अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे कंपनियां अपने पेटेंट अधिकारों का अनुचित विस्तार करके बाजार पर एकाधिकार बनाए रखें। उन्होंने कहा, “हम अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों कंपनियों से संवाद कर रहे हैं ताकि भारत के बौद्धिक संपदा कानूनों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) के अनुरूप बनाया जा सके। लेकिन यह भी सुनिश्चित करेंगे कि कोई कंपनी नियमों का गलत फायदा न उठाए।”
उन्होंने बताया कि मंत्रालय इस दिशा में संतुलित रुख अपनाएगा ताकि एक ओर नवाचार को प्रोत्साहन मिले और दूसरी ओर पेटेंट व्यवस्था का दुरुपयोग न हो।
नवोन्मेष और निवेश के लिए सकारात्मक माहौल
गोयल ने कहा कि अगर कुछ सुधार अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में अनुसंधान एवं नवोन्मेष (Innovation) के लिए प्रेरित करते हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मंत्रालय ने पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, भौगोलिक संकेत (Geographical Indications) और डिजाइन के क्षेत्र में आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई सुधार लागू किए हैं।
साथ ही, पेटेंट परीक्षकों की संख्या बढ़ाई गई है, प्रशिक्षण को आधुनिक बनाया गया है और कार्यालयों को डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।
राष्ट्रीय आईपीआर नीति और भविष्य की दिशा
भारत सरकार ने 2016 में राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नीति (National IPR Policy) लागू की थी, जिसके तहत सभी प्रकार के आईपीआर को एकीकृत ढांचे में लाया गया था। यह नीति बौद्धिक संपदा कानूनों के कार्यान्वयन, निगरानी और समीक्षा के लिए एक संस्थागत प्रणाली तैयार करती है।
गोयल ने कहा, “यह प्रक्रिया रातोंरात नहीं होगी। परामर्श पत्र जारी कर सभी हितधारकों से राय ली जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नए प्रावधान भारत के उद्योग, स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के हित में हों।”
एसईजेड और पीएलआई पर भी चर्चा
वाणिज्य मंत्री ने एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) अधिनियम में संभावित संशोधन पर भी संकेत दिए। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों की इकाइयां अब घरेलू बाजार में शुल्क-मुक्त बिक्री की अनुमति चाह रही हैं।
गोयल ने कहा, “यदि एसईजेड इकाइयां घरेलू आपूर्ति बढ़ाती हैं तो इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पीएलआई (Production Linked Incentive) योजना के तहत शुरुआती भुगतान कम होना स्वाभाविक है, क्योंकि यह योजना दीर्घकालिक परिणामों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
कतर दौरे का उद्देश्य
पीयूष गोयल इन दिनों कतर की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां वे कतर के नेताओं और उद्योगपतियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है।
सरकार का यह कदम भारत के बौद्धिक संपदा कानूनों को आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। इससे न केवल नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि विदेशी निवेश और घरेलू अनुसंधान पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिल सकती है।









