अतिवृष्टि, कर्ज और कम दाम ने तोड़ी किसानों की कमर
नए साल में भी नहीं थमा किसान आत्महत्याओं का सिलसिला
‘कॉटन सिटी’ के नाम से पहचाने जाने वाले यवतमाल जिले में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला नए साल में भी थमता नजर नहीं आ रहा है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी 2026 के सिर्फ 31 दिनों में जिले में 22 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। लगातार सामने आ रहे ये आंकड़े प्रशासन और सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पिछले खरीफ सीजन में हुई अत्यधिक बारिश ने जिले की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया। यवतमाल की अधिकांश खेती कपास और सोयाबीन पर निर्भर है, लेकिन अतिवृष्टि के कारण करीब 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें प्रभावित हुईं। सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, जबकि कई किसानों को बीज और खेती की लागत तक नहीं निकल पाई।
फसल नुकसान के बाद किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया। फसलों को उचित दाम न मिलना, बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और बैंक व साहूकारों का दबाव किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ रहा है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जनवरी माह में आत्महत्या करने वाले 22 किसानों में से 10 ने विषपान किया, 8 ने फांसी लगाई, जबकि अन्य मामलों में कुएं में कूदने या संदिग्ध हालात में मौत की पुष्टि हुई है।
प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ते कर्ज और बाजार में उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। नए साल की शुरुआत ही इस तरह की दर्दनाक घटनाओं से होने के चलते जिले में किसानों के लिए ठोस राहत पैकेज, कर्ज माफी और प्रभावी सहायता योजनाओं की मांग जोर पकड़ रही है।











