अजित पवार के निधन के बाद फाइल आगे बढ़ाने का आरोप
नागपुर में राज्य सरकार द्वारा 75 स्कूलों को अचानक अल्पसंख्याक दर्जा देने के फैसले ने खलबली मचा दी है। 28 जनवरी को इस प्रस्ताव पर सहमति होने की जानकारी सामने आते ही कई सवाल उठने लगे हैं। इस निर्णय को लेकर यह आरोप भी सामने आया कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद यह फाइल तुरंत आगे बढ़ा दी गई। उस समय अल्पसंख्याक विकास विभाग उनके अधीन कार्यरत था।
राज्य अल्पसंख्याक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस प्रकरण की सीआईडी के माध्यम से सख्त जांच कराने और दोषियों के खिलाफ मोक्का अंतर्गत कार्रवाई करने की मांग की है। आयोग ने कहा कि इस तरह के अचानक और संदिग्ध फैसले से शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और कानून की धारा पर सवाल उठते हैं।
राज्य में पहले से ही लगभग 8,500 स्कूल अल्पसंख्याक दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। इस दर्जे के तहत स्कूलों को ‘राइट टू एज्युकेशन’ कानून की कुछ शर्तों से छूट मिलती है। अल्पसंख्याक दर्जा पाने वाले स्कूलों को वित्तीय और प्रशासनिक सहायता भी प्राप्त होती है।
प्यारे खान ने कहा कि इस तरह के मामलों में जांच और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है ताकि किसी भी तरह का दुरुपयोग न हो और शिक्षा क्षेत्र में न्याय और पारदर्शिता बनी रहे। प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की प्रक्रियाओं में स्पष्ट नियम और पारदर्शी प्रणाली अपनाई जाए।











