नई दिल्ली। लोकसभा ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव को बुधवार को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए संकल्प पर 12 घंटे से अधिक समय की चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इसे मतदान के लिए सदन के समक्ष रखा। सदन ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, ध्वनिमत से संकल्प को अस्वीकृत कर दिया। संकल्प पर चर्चा और मतदान के दौरान बिरला सदन में उपस्थित नहीं थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है। उन्होंने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है। गृह मंत्री के एक शब्द को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और उनसे माफी की मांग की।
अमित शाह ने 56 मिनट तक जवाब दिया। उन्होंने इस दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और गिनाया कि 14वीं से 18वीं लोकसभा तक उन्हें बोलने के लिए कितना समय मिला। उन्होंने साफ कहा कि सदन नियम से चलेगा। स्पीकर को नियमों के उल्लंघन पर रोकने और टोकने का अधिकार है। “यह सदन क्लब नहीं है, जो नियम से नहीं चलेगा, उसका माइक बंद होगा।”
शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, “अरे भाई, यहाँ नियमों से बोलना पड़ता है। यहाँ इतने वरिष्ठ सदस्य बैठे हैं। मुझे तो अभी भी समझ नहीं आता कि शरद पवार, बालू साहब बैठे हैं, क्यों नहीं सिखाते उन्हें? ये पीएम मोदी से आकर गले लग जाते हैं। आँख मारते हैं। फ्लाइंग किस देते हैं। मुझे तो बोलने में भी शर्म आती है।” विपक्ष ने अमित शाह के खिलाफ ‘माफी मांगो’ के नारे लगाए।
शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जब बोलने का मौका आता है तो वह जर्मनी में होते हैं या इंग्लैंड में। फिर शिकायत करते हैं कि बोलने नहीं दिया गया। वक्फ संशोधन और धारा 370 जैसी चर्चाओं से राहुल गायब रहे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 16वीं लोकसभा में राहुल गांधी ने 2014, 2015, 2017 और 2018 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में भाग नहीं लिया था।












