लोकवाहिनी, संवाददाता:नई दिल्ली। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से चुनकर आए नेताओं ने सोमवार को राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली। भारतीय संसदीय इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। राज्यसभा के सभापति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने उच्च सदन के कक्ष में नवनिर्वाचित और पुननिर्वाचित 19 सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण समारोह का मुख्य आकर्षण मशहूर संवैधानिक वकील डॉ. मेनका गुरुस्वामी रहीं।
कानूनी लड़ाई से संसद तक का सफर
51 वर्षीय डॉ. मेनका गुरुस्वामी का राज्यसभा पहुंचना सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद के रूप में शपथ ली। डॉ. गुरुस्वामी देश की पहली ऐसी सांसद हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान एक LGBTQ+ सदस्य के रूप में साझा की है।
ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसे संस्थानों से शिक्षित डॉ. गुरुस्वामी को साल 2018 की उस ऐतिहासिक कानूनी जीत के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 के खिलाफ लड़ाई लड़कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करवाया था। टीएमसी ने अपनी रणनीति के तहत उन्हें उच्च सदन भेजा है ताकि संसद में संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की आवाज को मजबूती दी जा सके। शपथ लेने के बाद डॉ. गुरुस्वामी ने दोहराया कि वह संविधान के समानता और भेदभाव रहित मूल्यों को आगे बढ़ाएंगी।







