मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी, शिवसेना के भीतर एक बड़े ‘क्लीनअप ऑपरेशन’ के संकेत दिए हैं। शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पार्टी में केवल उन्हीं चेहरों को जगह मिलेगी जो जमीन पर उतरकर काम करेंगे। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि जो काम करेगा, वही पद पर रहेगा।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का विजन अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है। उन्होंने राज्य के सभी 43,000 गांवों तक शिवसेना के संगठन को मजबूती से पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। चूंकि वर्तमान में कोई बड़े चुनाव तत्काल प्रभाव में नहीं हैं, इसलिए शिंदे इस समय का उपयोग पार्टी की जड़ों को गहरा करने में करना चाहते हैं। उनका मानना है कि जब तक पार्टी का कार्यकर्ता अंतिम छोर के व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक संगठन की मजबूती अधूरी है।
सूत्रों के अनुसार, शिंदे खुद मंत्रियों और विधायकों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे हैं। वे केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा किए गए पार्टी विस्तार कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। पिछले हफ्ते पूरी शिवसेना कार्यकारिणी को भंग करना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि शिंदे अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं हैं।
निष्क्रिय नेताओं के लिए यह एक सीधा संदेश है कि यदि वे संगठन की सक्रियता में योगदान नहीं देते, तो उनकी छुट्टी होना तय है। एकनाथ शिंदे ने निर्देश दिए हैं कि शिवसेना के पदाधिकारियों को केवल नाम के लिए पद लेकर नहीं बैठना है। उन्हें जनता के बीच जाकर सरकारी योजनाओं का प्रचार करना होगा और संगठन के दायरे को बढ़ाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी का मतलब केवल अधिकार नहीं, बल्कि जवाबदेही है।
जो नेता इस कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें हटाकर नए और ऊर्जावान चेहरों को मौका दिया जाएगा। महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का मानना है कि शिंदे का यह कड़ा रुख आगामी स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों के लिए एक मजबूत ‘वॉर मशीन’ तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।










