लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आज, 22 अप्रैल 2026 को राज्य मंत्रिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में विकास, पर्यावरण और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए कई दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। सरकार ने विशेष रूप से हरित ऊर्जा और तकनीकी बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है। महाराष्ट्र के महायुति सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘महाराष्ट्र राज्य कॉम्प्रेश्ड बायोगैस नीति-2026’ को मंजूरी दी है। इस योजना के लिए सरकार ने चालू वर्ष में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस नीति के तहत, हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से बायोगैस परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए प्रत्येक जिले में एक समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) रूपरेखा है जिसका उपयोग मुख्य रूप से देश में अवसरंचना परियोजनाओं के लिए किया जाता है।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सीबीजी परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बैठक में एक अन्य निर्णय के तहत सातारा जिले के नागेवाड़ी में आईटी पार्क के लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) को 42.55 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने को मंजूरी दी गई। इसके लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) को 42.55 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की जाएगी। इस फैसले से सातारा और आसपास के क्षेत्र में आईटी सेक्टर को मजबूती मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
राज्य के सात आदर्श महाविद्यालयों के शिक्षकों को अब यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के निर्देशानुसार मूल वेतन मिलेगा। इसके अलावा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की भर्ती में इन शिक्षकों को अतिरिक्त अंक भी दिए जाएंगे। वहीं, राजस्व विभाग ने अधिकतम भूमि सीमा नियमों के तहत जमीन के रूपांतरण (वर्ग-2 से वर्ग-1) के प्रीमियम के पुनर्गठन को भी हरी झंडी दे दी है।
केईएम अस्पताल के नाम पर नया विवाद?
एक तरफ जहां कैबिनेट के फैसलों की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर मुंबई के ऐतिहासिक के.ई.एम. (KEM) अस्पताल के नाम को लेकर सियासत गरमा गई है। कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने बीएमसी को पत्र लिखकर अस्पताल का नाम बदलकर “कौशल्य श्रेष्ठ एकलव्य स्मारक अस्पताल” करने की मांग की है। लोढ़ा का तर्क है कि वर्तमान नाम ब्रिटिश काल का है और इसे बदला जाना चाहिए। इस मांग से आने वाले दिनों में राजनीतिक विवाद बढ़ने के आसार हैं।








