भारत के पास अपनी मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए पर्याप्त और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार : मूडीज
लोकवाहिनी, संवाददाता:नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत में आग लगी हुई है। क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंच गई है। इन सभी झटकों के बावजूद साल 2020 के बाद से दुनिया भर में आए तमाम आर्थिक तूफानों और भू-राजनीतिक संकटों के बीच, भारत सबसे मजबूत और लचीली बड़ी उभरती बाजार अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। मंगलवार को जारी वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अपनी मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए पर्याप्त और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। इसी भंडार ने वैश्विक संकटों के दौरान निवेशकों और बाजार का विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत अपनी मजबूत नीतियों के दम पर भविष्य में आने वाले किसी भी बड़े वैश्विक झटके का प्रबंधन करने के लिए अन्य देशों के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है। मूडीज की ‘इमर्जिंग मार्केट’ रिपोर्ट उभरते बाजारों की स्थिति का गहराई से विश्लेषण करती है। इसके अनुसार, भारत का मौद्रिक नीति ढांचा बेहद स्पष्ट और पूर्वानुमानित है, जो इसे आर्थिक झटकों से बचाने में एक ढाल का काम करता है। इसके साथ ही, देश में महंगाई की उम्मीदें काफी हद तक नियंत्रित हैं और जरूरत पड़ने पर देश की विनिमय दरों में समायोजन करने की क्षमता भी अर्थव्यवस्था को लचीलापन प्रदान करती है। रिपोर्ट बताती है कि भारत भविष्य के किसी भी तनाव की अवधि में मजबूत और सुलभ बफर के साथ प्रवेश करेगा, क्योंकि घरेलू फंडिंग पर इसकी निर्भरता को इसके गहरे स्थानीय बाजारों और भारी-भरकम भंडार द्वारा संतुलित किया गया है। भारत ने हाल के वैश्विक तनाव की अवधि से काफी पहले ही स्थिरता का समर्थन करने वाले प्रमुख नीतिगत विकल्प अपना लिए थे। मूडीज ने पिछले कुछ वर्षों में उभरे चार प्रमुख वैश्विक तनाव अवधियों के दौरान 10 बड़े उभरते बाजारों के प्रदर्शन का आकलन किया है, जिनमें भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्किये और अर्जेंटीना शामिल हैं।








