लोकवाहिनी, संवाददाता | लातूर। नीट पेपर लीक में सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लातूर के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरुरे को पुणे से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी इस मामले में एक नया मोड़ लेकर आई है, क्योंकि जांच एजेंसी अब न केवल पेपर लीक करने वाले गिरोह बल्कि इसे खरीदने वाले लाभार्थियों तक भी पहुंच रही है।
इस पूरे प्रकरण में डॉ. शिरुरे की गिरफ्तारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीट मामले में यह पहली बार है जब सीबीआई ने किसी छात्र के अभिभावक को गिरफ्तार किया है। अब तक की गिरफ्तारियां उन लोगों की हुई थीं जिन्होंने या तो पेपर लीक किया था या उसे बाजार में बेचा था। डॉ. शिरुरे पर संदेह है कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए गैर-कानूनी तरीके से लीक हुआ प्रश्नपत्र खरीदा था। इस गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच का दायरा अब उन माता-पिता तक भी फैल गया है जिन्होंने अपने बच्चों के लिए गलत रास्ते चुने। सीबीआई ने बुधवार को पुणे में पूछताछ के बाद अरेस्ट कर लिया। जानकारी आज सामने आई है। इस मामले में किसी पेरेंट्स की यह पहली गिरफ्तारी है।
नीट पेपर लीक में यह 11वीं गिरफ्तारी है। इससे पहले महाराष्ट्र से 6, राजस्थान से 3 और हरियाणा से एक व्यक्ति को अरेस्ट किया। इनमें 2 महिलाएं भी हैं। उधर, इस मामले में लगातार नए खुलासे भी हो रहे हैं। सीबीआई जांच में पता चला है कि शिवराज लातूर में 8 एकड़ जमीन पर स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी में था। वहां बहुमंजिला इमारत का निर्माण तेजी से चल रहा था।
सीबीआई उसके फंडिंग स्रोत, जमीन खरीद और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है। एजेंसी ने उसकी पत्नी और बेटे से भी पूछताछ की है। जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि गिरोह ने गेस पेपर को 5 से 50 लाख रुपये तक बेचा। यह गिरोह पेपर देने से पहले छात्र के परिवार की आर्थिक स्थिति देखते थे। इसके बाद रकम तय की जाती थी। सिर्फ टोकन मनी ली जाती थी। इसके लिए ब्लैंक चेक और छात्रों के डॉक्यूमेंट रख लेते थे। डील यह थी कि आंसर-की आने के बाद अगर यह साबित हो जाए कि दिया गया ‘क्वेश्चन बैंक’ असली पेपर से मेल खाता है, तब बाकी रकम ली जाएगी। परीक्षा के बाद कई परिजन ने पैसे देने से इनकार करना शुरू कर दिया।
उनका कहना था कि फिजिक्स के कुछ सवाल मेल नहीं खा रहे। कुछ ने आधी रकम दी और बाकी रिजल्ट के बाद देने की बात कही। आईबी से इनपुट मिलने के बाद 8 मई की रात राजस्थान एसओजी ने कार्रवाई शुरू की। उस समय भी गिरोह खरीदारों से पैसे वसूलने में जुटा था। सीकर में पेपर खरीदने वाले एक छात्र से पूछताछ के दौरान ही उसके पास पैसे मांगने के लिए दलाल का फोन आया। सीबीआई ने पेपर खरीदने वाले छात्रों के यहां छापेमारी की, जहां यही पैटर्न सामने आया।













