लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। महाराष्ट्र में विधान परिषद की 17 सीटों के चुनाव के मद्देनजर, महायुति में सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंस गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने इस चुनाव में 7 सीटों पर अपना दावा मजबूती से पेश किया है। खबरों के मुताबिक, शिवसेना ने भाजपा को आधिकारिक तौर पर कुल 7 सीटों का प्रस्ताव दिया है, जिनमें पिछली 5 सीटें और नवगठित 2 सीटें शामिल हैं। इस बार शिवसेना किसी भी तरह का राजनीतिक समझौता करने के मूड में नहीं है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अब अपनी ताकत के अनुसार ही सीटों की मांग कर रही है। सरनाईक के अनुसार, पार्टी की बढ़ती ताकत को देखते हुए 7 सीटें मिलना उनका हक है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा और अन्य चुनावों के दौरान शिवसेना ने कई बार गठबंधन धर्म निभाते हुए अपनी सीटों की कुर्बानी दी है, लेकिन विधान परिषद चुनाव में अब कार्यकर्ता और नेता दोबारा वैसी स्थिति बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।
प्राथमिक तौर पर बनी महायुति की सहमति के अनुसार, भाजपा 12 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही थी, जबकि शिवसेना को सिर्फ 3 और एनसीपी को 2 सीटें देने का फॉर्मूला तैयार था। लेकिन शिंदे सेना के सात सीटों वाले फॉर्मूले ने भाजपा के गणित को बिगाड़ दिया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए पीछे हटेगी या गठबंधन में टकराव की स्थिति पैदा होगी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी नो कॉम्प्रोमाइज का स्टैंड लेकर स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी का विस्तार ही उनकी प्राथमिकता है। अब गेंद भाजपा के पाले में है कि वह गठबंधन की एकता बनाए रखने के लिए अपनी सीटों का त्याग करती है या फिर सहयोगी दल को छोटा ही बनाए रखना चाहती है।













