व्यापार प्रतिनिधि:मुंबई। भारतीय अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है और मजबूत वृहद आर्थिक आधार चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि को सहारा देंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और वैश्विक बाजारों से आने वाली चुनौतियों के बावजूद कंपनियों एवं बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत बही-खाते तथा सरकार का पूंजीगत व्यय पर जोर भारत की मजबूत वृद्धि गति के लिए अनुकूल है। इसमें कहा गया है कि 2026 में भू-राजनीतिक जोखिम वैश्विक वृद्धि के लिए प्रमुख बाधा बनकर उभरा है। फरवरी 2026 के अंत में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने का असर वैश्विक वृद्धि और मुद्रास्फीति के अनुमानों में दिख रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मध्यम वैश्विक वृद्धि के परिदृश्य के बीच 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया में लंबा खिंचने वाला संघर्ष नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकता है।’ इसमें कहा गया कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ विभिन्न व्यापार समझौतों का क्रियान्वयन भारत की वृद्धि को और गति देगा। भारत वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहा, जबकि 2024-25 में यह वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत थी। यह मजबूत घरेलू मांग, निरंतर निवेश, सक्रिय नीतिगत पहल और ठोस व्यापक आर्थिक आधार से समर्थित रही।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2026-27 में कृषि क्षेत्र का परिदृश्य दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति एवं वितरण पर निर्भर करेगा। इसमें कहा गया, ‘अल नीनो की संभावना कृषि उत्पादन के लिए नकारात्मक जोखिम उत्पन्न करती है। हालांकि मानसून के उत्तरार्ध में वर्षा बढ़ाने वाली सकारात्मक हिंद महासागर द्विधुवीय स्थिति इसके प्रतिकूल प्रभाव को आंशिक रूप से कम सकती है।’ रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कच्चे माल, विशेषज्ञ उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं। हालांकि सरकार द्वारा विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने और भंडार प्रबंधन के प्रयास इन चिंताओं को कम करने में मदद करेंगे। इसके अलावा, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर और स्थिर कृषि संभावनाओं से 2026-27 में मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के अनुरूप रहने की संभावना है, भले ही अल नीनो की स्थिति और सामान्य से अधिक गर्मी हो। केंद्र सरकार ने आरबीआई के साथ परामर्श से एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ मुद्रास्फीति के लिए चार प्रतिशत का लक्ष्य बरकरार रखा है।
आरबीआई का बही-खाता 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का बही-खाता वित्त वर्ष 2025-26 में 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गया। घरेलू निवेश, सोने और विदेशी निवेश में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। केंद्रीय बैंक की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, बही-खाते का आकार 31 मार्च 2025 के 76,25,421.93 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गया। यानी इसमें 15,71,699.15 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। परिसंपत्तियों में वृद्धि घरेलू निवेश, सोने एवं विदेशी निवेश में क्रमशः 44.9 प्रतिशत, 63.8 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत की वृद्धि के कारण हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि देनदारियों में पुनर्मूल्यांकन खाते, जारी मुद्रा (नोट), जमा और अन्य देनदारियों में क्रमशः 63.4 प्रतिशत, 11.8 प्रतिशत, 11.6 प्रतिशत और 21.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कुल परिसंपत्तियों में घरेलू परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 31 मार्च 2026 तक 29.1 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना (जिसमें स्वर्ण जमा एवं भारत में रखा गया सोना शामिल है) तथा भारत के बाहर वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण व अग्रिम मिलाकर 70.9 प्रतिशत रही। यह अनुपात 31 मार्च 2025 को क्रमशः 25.7 प्रतिशत और 74.3 प्रतिशत था। आरबीआई ने कहा, ‘इस (2025-26) दौरान आय में 26.4 प्रतिशत और व्यय में 102.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष के अंत में कुल अधिशेष 2,86,588.46 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 2,68,590.07 करोड़ रुपये की तुलना में 6.7 प्रतिशत अधिक है।’








