प्रधानमंत्री ने लू से बचाव के उपायों से लेकर खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 134वें एपिसोड में समाज सेवा, जल संरक्षण, खेल, भीषण गर्मी से बचाव और भारत में आम की विविधता जैसे कई विषयों पर चर्चा की। उन्होंने लोगों से समाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ाने और सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग समाज के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें पहचानना, उनकी सराहना करना और उनसे सीखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने देशभर में नदियों, तालाबों और कुओं के संरक्षण तथा पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बचपन की यादों से जुड़े जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना विशेष संतोष और खुशी देता है।
ऐसे प्रयास जल संरक्षण के साथ-साथ लोगों की भागीदारी भी बढ़ाते हैं। उन्होंने हाल ही में झारखंड के रांची में आयोजित राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता का भी जिक्र किया, जहां चार अलग-अलग स्पर्धाओं में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बने। प्रधानमंत्री ने गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विनी शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार को नई उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने 100 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करने वाले गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेश कुजूर की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामान्य नागरिक देश के विकास में असाधारण योगदान दे रहे हैं। कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने जनभागीदारी, सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्र निर्माण के सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो लोगों को किसी अच्छे सामाजिक कार्य का हिस्सा भी बनना चाहिए। उनके अनुसार निस्वार्थ सेवा की कहानियां समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए दूसरों को भी प्रेरित करती हैं।
गर्मी से बचाव और पारंपरिक पेयों का जिक्र
देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मौसम में पर्याप्त पानी पीना, धूप में निकलते समय सतर्क रहना और सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोकप्रिय पारंपरिक पेयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में आम पन्ना, पंजाब और हरियाणा में लस्सी, राजस्थान और गुजरात में छाछ, बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू शरबत काफी लोकप्रिय हैं। वहीं कोंकण और गोवा में कोकम शरबत तथा सोलकद्री, जबकि दक्षिण भारत में पनकम, नीर मोर और सांबरम जैसे पेय प्रचलित हैं। उन्होंने कहा कि ये पारंपरिक पेय केवल गर्मी से राहत नहीं देते, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी दर्शाते हैं।













