मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ‘लाडकी बहन’ योजना वास्तविक जनकल्याण के बजाय राजनीतिक लाभ और मत प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। उनका कहना था कि योजना के अंतर्गत लगभग 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किए जाने से सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आदित्य ठाकरे ने किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार कर्जमाफी की घोषणाएं कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को कोई ठोस राहत नहीं मिल रही है। उनके अनुसार, राज्य के किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है, जबकि सरकार केवल आश्वासन देने तक सीमित है।
उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का उपयोग विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जांच एजेंसियों का निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य करना आवश्यक है।
ठाणे में कथित घोटालों का उल्लेख करते हुए आदित्य ठाकरे ने दावा किया कि आने वाले समय में ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने मनोज जरांगे से जुड़े मुद्दे पर भी राज्य सरकार की कार्यशैली की आलोचना की। ठाकरे ने कहा कि सरकार को जनता के महत्वपूर्ण प्रश्नों का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए और केवल राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।











