विधान परिषद चुनाव में नाम वापस लेने पर ठाकरे का बड़ा फैसला
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। राज्य में इस समय विधान परिषद चुनाव की सरगर्मी जारी है। आज विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने का अंतिम दिन था। अंतिम दिन राज्य की राजनीति में तेज़ हलचल देखने को मिली। महाविकास आघाडी और महायुति दोनों में कई लोगों ने टिकट न मिलने के कारण बगावत कर दी थी। इस बगावत का सबसे बड़ा असर महायुति पर पड़ेगा, ऐसा चित्र दिखाई दे रहा था। लेकिन नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन इस बगावत को रोकने में महायुति को बड़ी सफलता मिली है। लेकिन इसके विपरीत महाविकास आघाडी में स्थिति उल्टी देखने को मिली। महाविकास आघाडी की ओर से विधान परिषद के लिए जो उम्मीदवार मैदान में उतारे गए थे, उनमें से कुछ ने अचानक चुनाव से नाम वापस ले लिया। इसका सबसे बड़ा झटका शिवसेना ठाकरे गुट को लगा है।
रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना ठाकरे गुट ने बाल माने को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उन्होंने अंतिम समय पर चुनाव से नाम वापस ले लिया, जिसके कारण पार्टी ने उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत पार्टी से निष्कासित कर दिया। वहीं दूसरी ओर छत्रपति संभाजीनगर-जालना क्षेत्र से देवयानी डोंगगावकर को पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाया गया था। उन्होंने भी अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे शिवसेना ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है। इसके बाद शिवसेना ठाकरे गुट ने देवयानी डोंगगावकर और कृष्णा डोंगगावकर को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया। उन सभी नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिवसेना ठाकरे गुट ने इन तीनों नेताओं को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निकाल दिया है। वहीं दूसरी ओर इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस मामले में वित्तीय लेनदेन का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले के कारण अब माहौल काफी गर्म हो गया है।
कोंकण के शिवसेना (उबाठा) के प्रत्याशी चुनावी मुकाबले से हटे
महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) के उम्मीदवार बाल माने ने बृहस्पतिवार को आगामी विधानपरिषद चुनाव में कोंकण स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र की सीट से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और इसके लिए उन्होंने ‘खरीद-फरोख्त’ की कोशिशों को जिम्मेदार ठहराया है। एमवीए के सहयोगी राकांपा (एसपी) और कांग्रेस द्वारा समर्थित शिवसेना (उबाठा) के उम्मीदवार माने ने भाजपा मंत्री नितेश राणे की उपस्थिति में मीडिया के सामने यह घोषणा की जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा होने लगी है। उन्होंने कहा, मुझे निगम परिषदों और नगर परिषदों में अपनी पार्टी के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ अन्य सहयोगियों दलों के प्रतिनिधियों से भी हस्ताक्षर प्राप्त करने थे। हालांकि, मुझे इसमें सौदेबाजी की आशंका हुई, जो महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र की संस्कृति के अनुरूप नहीं है। मैंने इस बारे में अपने पार्टी नेताओं से चर्चा की और अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया।
नितेश राणे की उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर माने ने भाजपा नेता को ‘कोंकण की धरती का सपूत’ बताया। उन्होंने दोहराया कि उनका यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। एमवीए प्रत्याशी माने का मुकाबला राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य सुनील तटकरे के बेटे अनिकेत तटकरे से था। माने ने बताया कि इस निर्वाचन क्षेत्र में तीन जिलों में 1,018 मतदाता हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं है। उन्होंने नितेश राणे की उस पिछली टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने उन्हें स्वास्थ्य का ध्यान रखने और गर्मी में चुनाव प्रचार से बचने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, मुझे लगता है मैंने उनकी सलाह मान ली है और उसी के अनुसार काम किया है।
माने ने साथ ही कहा कि लोकसभा सदस्य नारायण राणे ने उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए राजी करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, मैंने 2024 के लोकसभा चुनाव में राणे के लिए प्रचार किया था। हालांकि बाद के विधानसभा चुनाव में मैं शिवसेना (उबाठा) के साथ था। अंतिम निर्णय लेने से पहले मैंने सभी पार्टी नेताओं से इस बारे में चर्चा की। इस घोषणा के बाद, शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने ‘एक्स’ पर लिखा कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए माने को निष्कासित कर दिया है। इस बीच, परभणी में शिवसेना मंत्री उदय सामंत ने पत्रकारों से कहा कि माने ने डर के मारे चुनाव से नाम वापस ले लिया। सामंत ने उन्हें 2014 और 2024 के विधानसभा चुनाव में हराया था।












