भाजपा ने शिवसेना (उबाठा) से खरीद-फरोख्त के आरोपों पर मांगे सबूत
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने शुक्रवार को शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास आगामी महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में कथित खरीद-फरोख्त के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत है, तो सार्वजनिक करें। बन ने भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए राउत की आलोचना की और उन्हें आदतन झूठा बताया। उन्होंने कहा कि यदि राउत के पास विधान परिषद चुनावों में खरीद-फरोख्त के आरोपों का कोई प्रमाण है, तो उन्हें उसे जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा संजय राउत से सवाल है कि उनकी ही पार्टी द्वारा नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए उम्मीदवार ने नामांकन पत्र तक दाखिल नहीं किया। उम्मीदवार न उतारने के लिए राउत ने कितने पैसे लिए?
राउत ने शुक्रवार सुबह एक्स पर पोस्ट कर कहा कि निर्विरोध चुनाव कराने के लिए बृहस्पतिवार को नामांकन पत्र की वापसी का जो नाटक हुआ, उस पर एक ही दिन में कम से कम 150 करोड़ रुपये खर्च हुए। उन्होंने लिखा, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के विधायक/प्रतिनिधि खुद ही बाजार में उतर आए और उन्होंने अपनी कीमत भी खुद तय कर ली। इसमें भारी मात्रा में धन का लेन-देन हुआ है। महायुति इस महीने होने वाले विधान परिषद चुनाव में 17 में से पांच सीटें निर्विरोध जीतने की स्थिति में है, क्योंकि इन सीटों पर विपक्षी उम्मीदवारों ने बृहस्पतिवार को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से पहले अपने नाम वापस ले लिए। गठबंधन ने बागी उम्मीदवारों को भी अंतिम दिन चुनाव मैदान से हटने के लिए मना लिया। बन ने कहा कि महायुति उम्मीदवारों को महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का पर्याप्त समर्थन प्राप्त है और चुनाव जीतने के लिए किसी तरह के प्रलोभन की जरूरत नहीं है। भाजपा नेता ने कहा कि चुनावों की घोषणा के समय विपक्षी महाविकास आघाड़ी (एमवीए) ने बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने सुझाव दिया कि राउत को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल से पूछना चाहिए कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों ने नाम वापस क्यों लिए। उन्होंने कहा, क्या कांग्रेस में बंद कमरों के पीछे कोई वित्तीय लेन-देन हुआ? बन ने कहा कि भाजपा या महायुति गठबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने से पहले राउत को ठोस सबूत पेश करने चाहिए।
सुनील तटकरे ने खरीद-फरोख्त के राउत के आरोपों को किया खारिज
राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने शुक्रवार को शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत द्वारा लगाए गए उन आरोपों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया कि महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में निर्विरोध जीत हासिल करने के लिए पैसों का लेन-देन हुआ। राउत ने शुक्रवार सुबह एक्स पर पोस्ट कर कहा कि निर्विरोध चुनाव कराने के लिए बृहस्पतिवार को नामांकन पत्र की वापसी का जो नाटक हुआ, उस पर एक ही दिन में कम से कम 150 करोड़ रुपये खर्च हुए। उन्होंने लिखा, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के विधायक/प्रतिनिधि खुद ही बाजार में उतर आए और उन्होंने अपनी कीमत भी खुद तय कर ली। इसमें भारी मात्रा में धन का लेन-देन हुआ है। महायुति इस महीने होने वाले विधान परिषद चुनाव में 17 में से पांच सीटें निर्विरोध जीतने की स्थिति में है, क्योंकि इन सीटों पर विपक्षी उम्मीदवारों ने बृहस्पतिवार को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से पहले अपने नाम वापस ले लिए। इन आरोपों पर संवाददाताओं से बात करते हुए तटकरे ने कहा, विपक्षी उम्मीदवारों के चुनाव से हटने में पैसों के लेन-देन के आरोप निराधार, मनगढ़ंत और बेबुनियाद हैं। इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाना संजय राउत की आदत बन गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि विपक्षी नेताओं ने विधान परिषद चुनाव से पहले ही हार स्वीकार कर ली थी। उन्होंने कहा, विपक्षी गठबंधन की जब भी बैठक होती थी, सीटों को लेकर हमेशा संघर्ष होता था। विपक्ष ने चुनाव से पहले ही मानसिक रूप से हार स्वीकार कर ली थी।










