वडेट्टीवार-धानोरकर खेमों में खुली जंग
लोकवाहिनी संवाददाता
चंद्रपुर। चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब खुली राजनीतिक लड़ाई में बदल गई है। पार्टी के दो प्रमुख गुटों के बीच शुरू हुई सीधी टक्कर ने स्थानीय राजनीति का माहौल गरमा दिया है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं, जिससे कांग्रेस के नगरसेवकों में भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सांसद प्रतिभा धानोरकर समर्थक गुट ने महानगरपालिका में गुटनेता बदलने के लिए बैठक बुलाई थी। इसके जवाब में मौजूदा गुटनेता और विजय वडेट्टीवार समर्थक राजेश अड्डुर ने एक दिन पहले ही आपात बैठक आयोजित कर पार्टी व्हिप जारी कर दिया। हालांकि, इस बैठक में 27 में से केवल 11 नगरसेवक ही शामिल हुए, जिससे कांग्रेस के भीतर की फूट खुलकर सामने आ गई। दोनों गुटों की ओर से लगातार पत्र जारी किए जा रहे हैं और एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक मोर्चाबंदी तेज हो गई है। स्थिति ऐसी बन गई है कि नगरसेवकों के सामने यह तय करना मुश्किल हो गया है कि वे किस गुट के निर्देशों का पालन करें। दोनों पक्षों की ओर से कानूनी कार्रवाई और सदस्यता समाप्त कराने की चेतावनियां भी दी जा रही हैं, जिससे नगरसेवकों में बेचैनी बढ़ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, धानोरकर समर्थक गुट के करीब 15 नगरसेवक यवतमाल के एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं। इसके बाद संबंधित गुट की ओर से नगरसेवकों के घरों पर बैठक संबंधी नोटिस भी चस्पा किए गए, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। वहीं, राजेश अड्डुर ने सभी 27 नगरसेवकों को पत्र भेजकर बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने धानोरकर समर्थक गुट की बैठक को अवैध बताते हुए नगरसेवकों को उसमें भाग न लेने और किसी भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न करने की सलाह दी है। दूसरी ओर, आधिकारिक बैठक में अनुपस्थित रहने वाले नगरसेवकों के खिलाफ अयोग्यता (डिस्कवालिफिकेशन) की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इससे दोनों गुटों के बीच दबाव की राजनीति और तेज हो गई है।
चार माह बाद फिर भड़का विवाद
गौरतल है कि कुछ महीने पहले भी गुटनेता के चयन को लेकर कांग्रेस में ऐसा ही विवाद सामने आया था, जो नागपुर से लेकर दिल्ली तक पहुंच गया था। उस समय समझौते के तहत विजय वडेट्टीवार गुट को गुटनेता पद और प्रतिभा धानोरकर गुट को महापौर पद की दावेदारी मिली थी। लेकिन महज चार महीने बाद ही विवाद फिर से भड़क उठने से कांग्रेस संगठन के भीतर समन्वय और नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस विवाद को सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन फिलहाल किसी भी गुट के पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दल भी नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह आंतरिक कलह आने वाले समय में जिले की राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।











