जलसंसाधन विभाग में क्या चल रहा है…. भाग – 12
राज्यस्तरीय क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के आयोजन में कथित अनियमितताएं
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। राज्यस्तरीय क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के नागपुर में हुए आयोजन में कथित आर्थिक अनियमितताओं की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है और अब पूरी खरीद प्रक्रिया पर ही गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। विशेष रूप से कोटे़शन पद्धति का उपयोग करके की गई करोड़ों रुपये की सामग्री खरीद में क्या सरकारी नियमों का पालन हुआ था, यह मुख्य मुद्दा चर्चा में आ गया है। सरकारी विभाग में किसी भी प्रकार की खरीद करते समय वित्तीय अधिकार नियमावली, निविदा प्रक्रिया और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए शासन निर्णयों का पालन करना अनिवार्य होता है। दस लाख रुपये तक के कार्यों के लिए भी निर्धारित कार्यपद्धति होती है और पारदर्शिता व प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए संबंधित निविदा या कोटे़शन प्रक्रिया को नियमबद्ध तरीके से लागू करना अपेक्षित होता है। लेकिन नागपुर पाटबंधारे प्रकल्प विभाग में हुई खरीद में क्या यह प्रक्रिया अपनाई गई, इस पर अब प्रश्नचिह्न उठ रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने विभिन्न विभागों के लिए ई-निविदा और निविदा प्रकाशन की व्यवस्था उपलब्ध कराई है। शासन निर्णय क्रमांक निविदा-0417/(प्र.क्र.287/17) तथा कार्यालयीन खरीद के लिए उद्योग, ऊर्जा एवं श्रम विभाग द्वारा 1 दिसंबर 2016 को जारी संशोधित नियमावली में निविदा प्रकाशन की अवधि, निविदा दस्तावेजों की कीमत, पात्रता, प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया, विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशन और अन्य आवश्यक प्रावधान स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। इन नियमों की अनदेखी कर केवल दरपत्रकों के आधार पर बड़े पैमाने पर खरीद किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसमें सबसे गंभीर प्रश्न कोटे़शन प्रक्रिया को लेकर उठाया जा रहा है। ऐसे रिकॉर्डों के कारण पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, यह संभावना भी नकारा नहीं जा सकता कि आपूर्तिकर्ता पहले से तय किए गए हों और उसके बाद कोटे़शन तैयार किए गए हों। हालांकि इसकी आधिकारिक जांच होना आवश्यक है। कार्यकारी अभियंता का पद जलसंपदा विभाग में अत्यंत जिम्मेदारी और प्रतिष्ठा वाला होता है।
सरकार ने वित्तीय अधिकारों की सीमाएं निर्धारित कर उन्हीं सीमाओं के भीतर खरीद के अधिकार दिए हैं। साथ ही हर खरीद प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी इन अधिकारियों पर होती है। इसलिए यदि नियमों की अनदेखी कर खरीद की गई है, तो यह केवल प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं बल्कि वित्तीय अनुशासन पर सवाल उठाने वाला मामला हो सकता है।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका का है। करोड़ों रुपये की खरीद की मंजूरी, जांच और लेखा-परीक्षण के चरणों में संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका थी, क्या उन्होंने दस्तावेजों की जांच की थी या संभावित त्रुटियों को नजरअंदाज किया गया, इसकी भी जांच की मांग की जा रही है।









