मंदिर ने राम रक्षा आंदोलन के लिए नहीं दी इजाजत
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के 18 जुलाई को होने वाले राम रक्षा आंदोलन से पहले ही एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। ठाकरे समूह ने रामनगर स्थित श्री राम मंदिर में राम रक्षा पाठ कर आंदोलन शुरू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट रूप से अनुमति देने से इनकार कर दिया है और कहा है कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के राजनीतिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ठाकरे समूह, जो भाजपा के खिलाफ नागपुर से एल्गार आह्वान करने की तैयारी कर रहा था, आंदोलन की शुरुआत में ही एक बड़ा झटका खा गया है। अब, मंदिर में प्रवेश से वंचित किए जाने के बाद, राज्य सरकार इस बात पर नजर रख रही है कि उद्धव ठाकरे आंदोलन की शुरुआत कहां से करेंगे और ठाकरे समूह की अगली रणनीति क्या होगी।
उबाठा का 18 को राम रक्षा आंदोलन
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी का रामरक्षा आंदोलन 18 जुलाई को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में आयोजित किया गया है। पार्टी के अनुसार, राम मंदिर और प्रभु श्रीराम की बदनामी के विरोध में ही नागपुर की धरती पर यह रामरक्षा आंदोलन गरजने वाला है। इस आंदोलन के जरिए शिवसेना (यूबीटी) विदर्भ क्षेत्र में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है। इस दौरान उद्धव ठाकरे के साथ युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे और पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। पार्टी ने विश्वास जताया है कि पूरे विदर्भ से शिवसैनिक और रामभक्त बड़ी संख्या में इस आंदोलन में शामिल होंगे।









