नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सात बड़े फैसले लिये। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मोबाइल फोन प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर, फर्टिलाइजर और रेलवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े फैसलों को मंजूरी दी। इनमें बनारस में गंगा और वरुणा नदियों के किनारे चार और छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले में सेमीकॉन 2.0 मिशन, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और यूरिया-2026 के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी शामिल हैं, जिन पर कुल 2,19,353 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की बैठक हुई। इसके बाद प्रेस ब्रीफिंग में कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी गई। प्रेस ब्रीफिंग केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, मैं आपके सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीईए) द्वारा लिए गए सात बड़े फैसले पेश कर रहा हूं।
कैबिनेट के दो फैसले वाराणसी के विकास को लेकर हैं। ये फैसले बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। कैबिनेट ने नेशनल हाईवे-19 (एनएच-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाले 46.039 किलोमीटर लंबे लिंक कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है। वाराणसी शहर में भीड़ कम करने के लिए वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 43.218 किलोमीटर लंबे लिंक के विकास को मंजूरी दी गई है।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में मुख्य कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड सहित मुख्य रूप से 6/4-लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है। इसे एनएचएआई द्वारा हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत कुल 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह कॉरिडोर वाराणसी में भीड़ कम करने की योजना का एक अहम हिस्सा है। यह एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।













