मंजूरी | कानून का उल्लंघन करने पर सात साल तक की सजा
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद और आधिकारिक राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने के बाद राज्य में धर्मांतरण-विरोधी कानून – ‘महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य कानून, 2026’ अब राज्य में लागू हो गया है। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह कानून 30 जुलाई को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हुआ और उसी तारीख से प्रभावी हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अब राज्य में अवैध धर्मांतरण के मामलों में नए कानून के प्रावधानों के अनुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस कानून को विधानमंडल ने मार्च के बजट सत्र में मंजूरी दी थी और उसके बाद इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल तथा फिर राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। यह कानून जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन, गलत जानकारी या शादी का वादा करके किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाता है। इस कानून का उल्लंघन करने पर सात साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि दोबारा अपराध करने वालों के लिए यह सजा 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है। धर्मांतरण से पहले जिला दंडाधिकारी को 60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य किया गया है; साथ ही धर्मांतरित व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन और अन्य रिश्तेदारों को शिकायत करने का अधिकार भी दिया गया है। विधानसभा में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), समाजवादी पार्टी और सीपीआई (एम) ने इस विधेयक का विरोध किया था, हालांकि शिवसेना (यूबीटी) ने इसका समर्थन किया था।
कम से कम 12 राज्यों में पहले से ही धर्मांतरण-विरोधी कानून मौजूद कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में तर्क दिया था कि यह कानून असंवैधानिक है और यह निजता के अधिकार का उल्लंघन करने वाला है। समाजवादी पार्टी का कहना था कि यह कानून एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। विपक्ष की मांग थी कि इस विधेयक को संयुक्त चयन समिति के पास भेजा जाए। इस कानून का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि जबरदस्ती या धोखे से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना इसका उद्देश्य है; स्वेच्छा से होने वाले धर्मांतरण या अंतरधार्मिक विवाहों को निशाना बनाना इसका उद्देश्य नहीं है। मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे कम से कम 12 राज्यों में पहले से ही धर्मांतरण-विरोधी कानून मौजूद हैं। इसके अलावा झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान में भी ऐसे कानून हैं।













