ऐलान : ईएमआई नहीं घटेगी, ब्याज दर 5.25% पर बरकरार : आरबीआई गवर्नर
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बुधवार को उम्मीद के अनुरूप प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इस साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने के साथ तटस्थ रुख को भी बरकरार रखा। इसके साथ ही आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक का ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के रुख पर अगला फैसला आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी, यानी एमपीसी की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को बताया कि दुनियाभर में जारी उठापटक की वजह से महंगाई बढ़ी है। इसके चलते फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई का यह फैसला अपनी बचत के पैसे बैंक में रखने वालों के लिए राहतभरा है, क्योंकि एफडीपर मिलने वाला ब्याज फिलहाल कम नहीं होगा। आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, वैश्विक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है।
मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य मध्यम अवधि में खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाना है। आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया।
प्लास्टिक के नोट अप्रैल-मई 2027 में आएंगे
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि आरबीआई अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने की तैयारी कर रहा है। पॉलिमर नोट एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक जैसे सिंथेटिक पदार्थ से बनाया जाता है। इसमें एक मजबूत और लचीली प्लास्टिक फिल्म का इस्तेमाल होता है, जिस पर नोट की छपाई की जाती है। ये नोट कागजी नोट की तुलना में अधिक टिकाऊ होंगे और जल्दी खराब नहीं होंगे।
मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के बाद मल्होत्रा ने संवाददाताओं से कहा कि कुछ देशों में पॉलिमर नोट का 30 वर्षों से अधिक समय तक चलने का रिकॉर्ड है। ये नोट खासतौर पर कम मूल्य वर्ग के नोटों के लिए उपयोगी होंगे, क्योंकि इनका उपयोग और चलन अधिक होता है। उन्होंने कहा, अगर सभी योजनाएं तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो हमारा लक्ष्य है कि ये नोट अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में चलन में आ जाएं।











