मुख्य जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास न हो : आजाद समाज पार्टी
लोकवाहिनी संवाददाता
गढ़चिरोली। आदिवासी आश्रमशाला में सर्पदंश से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत के मामले में आजाद समाज पार्टी ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों व संस्थाचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी के जिलाध्यक्ष राज बंसोड ने आरोप लगाया कि आश्रमशाला में सुरक्षा, स्वच्छता, बेड-पलंग और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण यह गंभीर स्थिति पैदा हुई और इसकी पूरी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। राज बंसोड ने कहा कि तीन छात्राओं की मौत केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानकर इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। आश्रमशाला में विद्यार्थियों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों की जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। आश्रमशाला की अधीक्षिका के खिलाफ की गई निलंबन कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। बंसोड ने कहा कि अधीक्षिका के अवकाश पर रहने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था करना वरिष्ठ प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में केवल अधीक्षिका के खिलाफ कार्रवाई कर पूरे मामले की जिम्मेदारी उनके ऊपर डालना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधीक्षिका पर कार्रवाई करके मामले से जुड़े अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाचालक की भूमिका से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि जांच केवल अधीक्षिका तक सीमित न रखते हुए आश्रमशाला की संपूर्ण व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारों की जांच की जाए।
संस्थाचालक की चुप्पी पर भी सवाल
तीन छात्राओं की मौत पर संस्थाचालक की ओर से संवेदना व्यक्त करने वाला बयान सामने नहीं आने का आरोप लगाते हुए बंसोड ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में संवेदनशीलता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि जनप्रतिनिधि मौजूद हैं। उनका दायित्व केवल चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए भी आवाज उठानी चाहिए। राज बंसोड ने कहा कि गरीब आदिवासी परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद में आश्रमशालाओं में भेजते हैं। यदि ऐसी संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा से समझौता होता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों से भी ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। आजाद समाज पार्टी ने सरकार से मांग की कि तीनों छात्राओं की मौत की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आश्रमशालाओं में सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की तत्काल समीक्षा की जाए।
मृत छात्राओं के परिवारों को 50-50 लाख की मदद और नौकरी दें सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र अलोणे ने सरकार से उठाई आवाज
अहेरी। गढ़चिरोली जिले के धानोरा तहसील के जपलतई स्थित कुप्पा लिंगो शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास अनुसंधान स्कूल तथा आश्रमशाला के छात्रावास में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत की घटना ने आदिवासी क्षेत्रों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र अलोणे ने सरकार से मृत छात्राओं के परिवारों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छात्रावास में सो रहे छह विद्यार्थियों को सांप ने डंस लिया था। इनमें तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य विद्यार्थियों की हालत गंभीर होने के कारण उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। सुरेन्द्र अलोणे ने सरकार से मांग की है कि सर्पदंश से मृत छात्राओं के परिवारों को प्रत्येक 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। वहीं, उपचारधीन तीन विद्यार्थियों के परिवारों को प्रत्येक 25 लाख रुपये की मदद दी जाए।
इसके अलावा मृत छात्राओं के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उन्होंने की है। सुरेन्द्र अलोणे ने अपने बयान में कहा कि जिले की कई आश्रमशालाओं और स्कूलों में आज भी विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन समस्याओं की ओर प्रशासन द्वारा अपेक्षित गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। आश्रमशालाओं में भवन, छात्रावास, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच कर कमियों को तत्काल दूर किया जाना जरूरी है। अलोणे ने कहा कि जिस दिन देश और दुनिया में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह और गौरव के साथ मनाया जा रहा था, उसी दिन आदिवासी समाज की तीन मासूम छात्राओं की सर्पदंश से मौत होना बेहद चिंताजनक है। इस घटना ने आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शासन और संबंधित शिक्षण संस्थाओं के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जपलतई आश्रमशाला की घटना की पुनरावृत्ति भविष्य में कहीं भी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को तत्काल कठोर कदम उठाने चाहिए और जिले की सभी आश्रमशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार करने चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र अलोणे ने सरकार से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं स्थायी उपाय करने की मांग की है।











