आरएसएस प्रमुख भागवत के बयान पर बोले मुख्यमंत्री फड़णवीस
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू धर्म के समावेशी स्वरूप पर जोर देने के एक दिन बाद, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने रविवार को कहा कि सहिष्णुता ही हिंदुत्व की आत्मा है। उन्होंने नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लेकिन सहनशीलता का मतलब यह नहीं है कि हमलों का जवाब न दिया जाए। फड़णवीस ने कहा कि हिंदू धर्म ने आक्रमणकारियों को अपनी धारा में समाहित कर लिया और बाहरी दुनिया द्वारा ठुकराए गए लोगों को भी अपनी संस्कृति में शामिल किया, चाहे वे यहूदी हों या ईरान से आए हमारे भाई। उन्होंने कहा, इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं कि हिंदुओं को धार्मिक सहिष्णुता न सिखाएं। सहिष्णुता हिंदुओं के खून में है। हिंदुत्व का एक अहम अर्थ सहिष्णुता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए बयान पर अब सियासत तेज हो गई हैं।
संघ प्रमुख ने न्यूयार्क में आयोजित वन वर्ल्ड : वन ह्यूमैनिटी फेथ लीडर्स समिट में कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू ही नहीं रहेगा। इस बयान पर जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से नागपुर में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख की कही बात 100 फीसदी सही है, क्योंकि सहिष्णुता (सहनशीलता) ही हिंदुत्व की आत्मा है। भारत ने उन अनेक लोगों को अपनाया है जिन्हें दुनिया ने ठुकरा दिया था। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं कि हिंदुओं को धार्मिक सहिष्णुता सिखाने का प्रयास किसी को नहीं करना चाहिए। सहिष्णुता हिंदुओं के खून में है और यह हिंदुत्व का मूलभूत सिद्धांत है। यदि कोई हमला करता है, तो उसे जवाब देना निश्चित रूप से आवश्यक है। हालांकि, कोई हिंदू कभी पहले हमला नहीं करता, वह हमेशा सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करता है। लेकिन अपनी रक्षा करना और हमलावर का विरोध करना भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन उन्होंने कहा कि वहां जिस सिद्धांत पर चर्चा हुई है वह बिल्कुल सही है। सहिष्णुता हिंदुत्व की आत्मा है। (पेज 6 पर)
मराठा प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले
मराठा आरक्षण के लिए चल रहे आंदोलन के मद्देनजर, सरकार ने बातचीत के द्वार खुले रखे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा है कि मुझे ऐसा लगता है कि जो भी आंदोलन चल रहा है, उस आंदोलन में सरकार के प्रतिनिधि वहां मौजूद हैं। वे चर्चा करेंगे। इससे पहले भी हमने रास्ता निकाला है। आगे भी हम रास्ता निकालेंगे। उपमुख्यमंत्री शिंदे शुरुआत से ही बेहद संवेदनशीलता से काम कर रहे हैं। जाति सत्यापन समिति रद्द करने की मांग पर मुख्यमंत्री फड़णवीस ने कहा, जो भी मांगें कानूनी होंगी, संविधान के अंतर्गत होंगी और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का उल्लंघन करने वाली नहीं होंगी, ऐसी सभी मांगों के लिए हमने चर्चा के दरवाजे खुले रखे हैं।












