काठमांडू। पूर्वी नेपाल में पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी है। लगातार बारिश से कई इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ आने से अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां बचाव और राहत कार्य में जुटी हैं।
नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के प्रवक्ता कालिदास धौवजी ने बताया कि सबसे अधिक जनहानि कोशी प्रांत के इल्लम जिले में हुई है, जहां विभिन्न स्थानों पर 37 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। देउमाई और माईजोगमाई नगरपालिकाओं में आठ-आठ, इल्लम और संदकपुर क्षेत्रों में छह-छह, मंगसेबुंग में तीन और फाकफोकथुम गांव में एक व्यक्ति की जान गई।
इसके अलावा, उदयपुर में दो, पंचथर में एक व्यक्ति की मौत भूस्खलन से हुई, जबकि रौतहट में बिजली गिरने से तीन और खोतांग में दो लोगों की मौत हुई। पंचथर जिले में सड़कों के धंसने से हुई एक दुर्घटना में भी छह लोग मारे गए।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, कई जिलों में अब भी लोग लापता हैं। रसुवा जिले के लांगटांग क्षेत्र में उफनती नदी में चार ट्रैकर्स बह गए हैं, जबकि इल्लम, बारा और काठमांडू से भी लापता होने की खबरें हैं।
नेपाल सेना, पुलिस और एपीएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हैं। वायुसेना ने इल्लम से एक गर्भवती महिला सहित चार लोगों को रेस्क्यू कर धरान के अस्पताल में भर्ती कराया है।
नेपाल में पाँच प्रांतों कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी और लुम्बिनी में मानसून सक्रिय है। लगातार बारिश से सड़कें, पुल और आवासीय क्षेत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई जगह यातायात बंद है और काठमांडू से आने-जाने वाले वाहनों पर अस्थायी रोक लगाई गई थी, जिसे अब मौसम में सुधार के बाद आंशिक रूप से हटा दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल में तबाही पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “नेपाल में भारी बारिश से हुई जनहानि और क्षति दुखद है। इस कठिन समय में हम नेपाल की जनता और सरकार के साथ हैं। एक मित्रवत पड़ोसी और प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में भारत हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
नेपाल सरकार ने रविवार को बयान जारी कर बताया कि मौसम में आंशिक सुधार के बाद कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपात सेवाओं, यात्री और मालवाहक वाहनों को अनुमति दी गई है। हालांकि, जोखिम भरे इलाकों में रात के समय वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
बागमती और पूर्वी राप्ती नदियों के आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, तीन और दिन तक भारी बारिश और भूस्खलन की संभावना है।
इस बीच, त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (टीआईए) से काठमांडू, पोखरा, जनकपुर, भद्रपुर और भरतपुर के लिए घरेलू उड़ानें सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं।
नेपाल में मानसून की यह मार इस साल अब तक की सबसे विनाशकारी आपदा मानी जा रही है। बढ़ती जनहानि के बीच भारत ने मदद का भरोसा देकर यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और आपसी संबंध पहले की तरह मजबूत हैं।











