सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी वकील को पकड़ लिया और कोर्ट कक्ष से बाहर निकाल दिया। इस घटना की देशभर में कड़ी निंदा हो रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे “न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर हमला” बताया है।
घटना उस समय घटी जब मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ वकीलों द्वारा उल्लेख किए गए मामलों की सुनवाई कर रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी वकील ने नारेबाजी करते हुए मुख्य न्यायाधीश की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों ने उसे तुरंत काबू में ले लिया। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसने “सनातन धर्म का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए। मुख्य न्यायाधीश गवई ने संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इन घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता और अदालत की कार्यवाही सामान्य रूप से जारी रखने का निर्देश दिया।
इस घटना पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “आज सुप्रीम कोर्ट में भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश पर हमले का प्रयास शर्मनाक और घृणित है। यह हमारी न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर हमला है।” खरगे ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी योग्यता, ईमानदारी और दृढ़ निश्चय से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचता है और उसे इस तरह निशाना बनाया जाता है, तो यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आगे लिखा कि यह हरकत दर्शाती है कि पिछले एक दशक में नफरत और कट्टरता ने हमारे समाज को कितनी गहराई तक प्रभावित किया है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी वकील हाल में खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापना को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और सीजेआई की कथित टिप्पणी से नाराज था। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश की आलोचना भी हुई थी। हालांकि, तब सीजेआई गवई ने कहा था कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और सोशल मीडिया पर प्रसारित टिप्पणियां उनके विचारों का गलत अर्थ निकाल रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCOARA) ने भी इस घटना की निंदा की है। एसोसिएशन ने बयान जारी कर कहा कि यह कृत्य न केवल मुख्य न्यायाधीश का अपमान है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा प्रहार है। यह बार और बेंच के बीच पारस्परिक सम्मान की भावना के खिलाफ है। बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव रोहित पांडेय ने पुष्टि की कि आरोपी 2011 से बार का सदस्य था और उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था में हुई यह घटना न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। जहां एक ओर मुख्य न्यायाधीश गवई ने संयम दिखाते हुए कहा कि उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता, वहीं राजनीतिक और कानूनी जगत में इसे “लोकतंत्र और न्यायपालिका पर हमला” बताया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ में उसके उद्देश्यों का पता लगाया जा रहा है।











