नागपुर। नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को हुए मतदान के दौरान कई मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर में रहने वाले मतदाताओं को मतदान के लिए ग्रामीण क्षेत्रों तक जाना पड़ा। कुछ मतदाताओं को 15 किमी तक का सफर तय करना पड़ा। इससे जिला प्रशासन और निर्वाचन कार्यालय की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मतदाताओं का कहना था कि जब उनके घरों के 2 किमी के दायरे में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो उन्हें मतदान के लिए 15 किमी दूर क्यों भेजा गया?
मतदान का प्रतिशत कम रहने के पीछे इसे भी एक संभावित कारण माना जा रहा है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 2,55,603 मतदाता हैं, जिनमें से नागपुर जिले में 1,44,466 मतदाता शामिल हैं। नागपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग हर 2 किमी के दायरे में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कई मतदाताओं को 15 किमी दूर मतदान केंद्र आवंटित किए गए। वाड़ी और दत्तवाड़ी के मतदाताओं को नगर पंचायत बेसा क्षेत्र में मतदान केंद्र दिया गया। इसी तरह दिघोरी, हुडकेश्वर और ग्राम पंचायत पांजरी (मिहान) के मतदाताओं को भी मतदान के लिए बेसा पहुंचना पड़ा। दूसरी ओर, बेसा के करीब 50 फीसदी मतदाताओं को 2 किमी के दायरे में मतदान केंद्र मिला, जबकि शेष 50 फीसदी मतदाताओं को लगभग 15 किमी दूर वाड़ी जाकर मतदान करना पड़ा। मतदान केंद्रों के इस तरह के आबंटन से मतदाताओं में नाराजगी देखी गई।
नागपुर में फर्जी मतदान का संदेह, मैंने वोट नहीं दिया मेरी उंगली पर स्याही का निशान भी नहीं
नागपुर। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव 2026 में दोहरे मतदान (फर्जी मतदान) का मुद्दा चर्चा में है, ऐसे में नागपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक मतदाता की जगह किसी और ने मतदान कर दिया है। जब मतदाता डॉ. प्रशांत गायकवाड नागपुर के दिघोरी क्षेत्र स्थित अमित प्राथमिक विद्यालय में मतदान करने गए तो मतदान केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि उनकी जगह किसी और ने मतदान कर दिया है। जब डॉ. गायकवाड ने वहां हस्ताक्षर की जांच की, तो उन्हें पता चला कि हस्ताक्षर किसी और के थे। जब प्रशांत गायकवाड ने मतदान केंद्र के कर्मचारियों से कहा कि यह मेरा हस्ताक्षर नहीं है और मैंने वोट नहीं दिया है, तो सुरु में विवाद खड़ा हो गया। अंततः, गायकवाड ने स्वीकार किया कि उन्होंने वोट नहीं दिया। मेरी उंगली पर स्याही का कोई निशान नहीं था जिससे यह साबित हो कि उन्होंने वोट दिया था।
जब यह सवाल उठा कि मेरे नाम पर किसने वोट दिया है, तो मतदान केंद्र के कर्मचारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने प्रशांत गायकवाड को वोट डालने की अनुमति दे दी। इस बीच, प्रशांत गायकवाड ने मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि कुछ लोग दोहरे मतदाता होने के नाम पर फर्जी मतदान करने की कोशिश कर रहे हैं। मतदाता सूची में त्रुटि, कांग्रेस ने लगाया आरोप – कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री नितिन राउट ने गंभीर आरोप लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा पंजीकृत सभी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में हैं, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा पंजीकरण के लिए दिए गए कई नाम मतदाता सूची में नहीं हैं।
नागपुर के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आज मतदान करने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह आरोप लगाया। मतदाता सूची में एक ही परिवार के चार सदस्यों के नाम दर्ज कराने पर एक या दो लोगों के नाम ही दर्ज हुए हैं, बाकी लोगों के नाम दर्ज नहीं हुए। एक जैसे दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण के लिए दिए गए कुछ नाम क्यों दर्ज नहीं किए गए? नितिन राउट ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रणाली के पास इसका कोई जवाब नहीं है। मतदाता सूची में हजारों नाम दोहराए गए हैं। नितिन राउट ने यह भी कहा कि हालांकि चुनाव प्रणाली यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरत रही है कि कोई भी व्यक्ति इस संबंध में हलुनामा भरकर दो बार मतदान न करे, फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि मतदाता सूची में त्रुटि है।
महिला मतदाता के नाम पर अन्य व्यक्ति ने की वोटिंग
सावनेर में एक महिला मतदाता के नाम पर कोई और वोटिंग कर चलता बना। इस मामले की गहन जांच की मांग की जा रही है। यह दावा किया गया है कि प्रीति अजय बंड जब सावनेर के मतदान केंद्र संख्या 18 पर मतदान करने पहुंचीं तो पता चला कि कोई और व्यक्ति उनके नाम से मतदान कर चुका है। उनके द्वारा आपत्ति जताने पर उन्हें निविदा मतदान प्रक्रिया पूरी कराई गई। इस घटना से यह सवाल उठ रहा है कि जब वह मतदान केंद्र पर मौजूद थीं, तब उनके नाम से पहले किसने मतदान किया था।
38 उम्मीदवारों के कारण मतपत्रों को लेकर भ्रम की स्थिति
नागपुर। महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर डिवीजन में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए शुक्रवार को मतदान शुरू होते ही मतदाताओं को एक अलग ही चुनौती का सामना करना पड़ा। भाजपा और कांग्रेस मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने के लिए कड़ी टक्कर दे रहे थे, लेकिन स्नातक मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति के कारण वास्तविक मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। मैदान में 38 उम्मीदवारों के होने के कारण, कई मतदाता बड़े मतपत्र पर अपनी पसंद दर्ज करने के तरीके को लेकर असमंजस में थे। यह भी पता चला कि मतदान केंद्र पर अधिकारी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते समय असंगत निर्देश दे रहे हैं। इसके कारण, बड़ी संख्या में वोटों के अवैध होने की आशंका है।
नागपुर मंडल के छह जिलों में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला है। हालांकि, मतदान केंद्रों पर पहुंचने के बाद मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया समझाने में परेशानी होती नजर आई। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में मतपत्र पर वरीयता दर्ज करने का तरीका महत्वपूर्ण है। इसलिए, पसंदीद उम्मीदवार के सामने केवल ‘1’ लिखना पर्याप्त नहीं है, मतदाताओं को वरीयता के नियमों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इस चुनाव में 38 उम्मीदवार होने के कारण मतपत्र बड़ा है। इसलिए मतदाताओं के मन में कई सवाल थे, जैसे कि कितने उम्मीदवारों को वोट देना है, अपनी पसंद कैसे दर्ज करनी है और मतदान के दौरान किन नियमों का पालन करना है।














