नई दिल्ली| दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर सोमवार को एक अप्रत्याशित घटना घटी, जब लंदन विश्वविद्यालय (University of London) की जानी-मानी हिंदी विद्वान और स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) की एमेरिटा प्रोफेसर फ्रांसेस्का ओरसिनी (Francesca Orsini) को देश में प्रवेश से रोकते हुए वापस भेज दिया गया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर ओरसिनी को “वीज़ा शर्तों के उल्लंघन” के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था। वह सोमवार को हांगकांग से दिल्ली पहुंची थीं और आव्रजन प्रक्रिया के दौरान उन्हें रोक लिया गया। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह “एक मानक वैश्विक प्रथा” है, जिसके तहत वीज़ा नियम तोड़ने वालों को प्रतिबंधित किया जा सकता है।
क्या है मामला?
सूत्रों के मुताबिक, फ्रांसेस्का ओरसिनी टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आ रही थीं, जबकि उनके अकादमिक और व्याख्यान संबंधी कार्य को वीज़ा नियमों का उल्लंघन माना गया।
अधिकारियों के अनुसार, उन्हें मार्च 2025 से ब्लैकलिस्ट किया गया है और अब भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कौन हैं फ्रांसेस्का ओरसिनी?
फ्रांसेस्का ओरसिनी हिंदी साहित्य और दक्षिण एशियाई अध्ययन की वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध विद्वान हैं।
उनकी प्रमुख किताबें हैं —
- The Hindi Public Sphere (1920–1940): Language and Literature in the Age of Nationalism
- Print and Pleasure (2009)
- Before the Divide: Hindi and Urdu Literary Cultures (2010)
- Love in South Asia: A Cultural History (2006)
ओरसिनी ब्रिटिश अकादमी की फेलो हैं और वर्तमान में साहित्यिक बहुभाषावाद पर अनुसंधान कर रही हैं। उन्होंने हाल ही में यूरोपीय अनुसंधान परिषद (ERC) की परियोजना भी पूरी की है, जिसमें भारत, माघरेब और अफ्रीका के साहित्यिक भूगोलों का तुलनात्मक अध्ययन शामिल है।
बौद्धिक जगत की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम ने भारत और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जगत में गहरी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।
प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा —
“फ्रांसेस्का ओरसिनी भारतीय साहित्य की महान विद्वान हैं। उन्हें बिना किसी कारण के निर्वासित करना एक असुरक्षित और मूर्खतापूर्ण कदम है।”
वहीं, लेखक और इतिहासकार मुकुल केशवन ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा —
“विडंबना है कि जो सरकार हिंदी को बढ़ावा देने का दावा करती है, उसी ने एक हिंदी विद्वान पर प्रतिबंध लगाया है।”
बताया जाता है कि प्रोफेसर ओरसिनी अक्टूबर 2024 में अंतिम बार भारत आई थीं और उस दौरान उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दिए थे।
इस बार उनकी यात्रा भी शैक्षणिक मानी जा रही थी, हालांकि वे टूरिस्ट वीज़ा पर आई थीं — यही उनके निर्वासन का कारण बताया जा रहा है।








