भुवनेश्वर। ओडिशा की राजनीति में नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि कांग्रेस उम्मीदवार घासीराम माझी के खिलाफ हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
भाजपा की राज्य इकाई के उपाध्यक्ष जतिन मोहंती के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को एक लिखित शिकायत सौंपी।
शिकायत में दावा किया गया है कि माझी के खिलाफ नुआपाड़ा थाने में दर्ज दो आपराधिक मामले (क्र. 146/2022 और 10/2018) अब भी अदालत में लंबित हैं, लेकिन उन्होंने 18 अक्टूबर को दाखिल नामांकन पत्र के साथ दिए हलफनामे में इनका उल्लेख नहीं किया।
भाजपा का आरोप
भाजपा का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान घासीराम माझी ने अपने हलफनामे में इन मामलों का खुलासा किया था, लेकिन इस बार जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया।
पार्टी ने कहा कि यह आचरण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125-ए के तहत दंडनीय अपराध है।
जतिन मोहंती ने मीडिया से कहा,
“जब कोई उम्मीदवार अपने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ धोखा है। आयोग को तुरंत मेरे नामांकन को रद्द कर सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।”
चुनावी पृष्ठभूमि
नुआपाड़ा विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है।
यह सीट हाल ही में विधायक के निधन के बाद खाली हुई थी।
अब इस उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस और बीजद तीनों दलों के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है।
कांग्रेस की चुप्पी
कांग्रेस उम्मीदवार घासीराम माझी से इस आरोप पर प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व की ओर से भी इस मामले पर अभी कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कानूनी स्थिति
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार,
कोई भी उम्मीदवार अपने नामांकन के साथ दिए जाने वाले हलफनामे में
सभी लंबित आपराधिक मामलों, संपत्ति और देनदारियों की सच्ची जानकारी देने के लिए बाध्य होता है।
जानकारी छिपाने की स्थिति में उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।










