पटना। बिहार विधानसभा चुनावों में सियासी गर्माहट चरम पर है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (Indian National Developmental Inclusive Alliance – I.N.D.I.A.) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।
यह ऐलान महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया, जिसमें कांग्रेस नेता अशोक गहलोत, RJD के नेता तेजस्वी यादव, पवन खेड़ा, दिपांकर भट्टाचार्य CPI(ML)), VIP के मुकेश सहनी और अन्य सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
गहलोत ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की सहमति से लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर उपमुख्यमंत्री के पद पर VIP प्रमुख मुकेश सहनी सहित समाज के अन्य वर्गों से प्रतिनिधियों को नियुक्त किया जाएगा।
गहलोत ने तेजस्वी को युवा, प्रतिबद्ध और जनता के बीच लोकप्रिय बताया। उन्होंने कहा:
“तेजस्वी एक नौजवान हैं, जिनका लंबा फ्यूचर है। जिनका लंबा फ्यूचर होता है जनता उसका साथ देती है। ये नौजवान हैं और कमिटमेंट रखते हैं। पिछली बार इन्होंने जो नौकरी के स्लोगन दिए थे और जो वादे किए थे, उसमें खरे उतरे।”
महागठबंधन में ‘फ्रेंडली फाइट’ खत्म, उम्मीदवार नाम वापस लेने शुरू
महागठबंधन में सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा के बाद फ्रेंडली फाइट जैसी स्थिति धीरे-धीरे खत्म हो रही है। कुछ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लेना शुरू कर दिया है, जिससे गठबंधन के भीतर संतुलन बना रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और पोस्टर का संदेश
महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। महागठबंधन के पोस्टर में सिर्फ तेजस्वी यादव की तस्वीर को प्रमुखता दी गई थी, जो जनता में उनके मुख्यमंत्री चेहरा बनने की मांग को दर्शाती है।
कांग्रेस सांसद पप्पू यादव ने टिप्पणी की कि
“राहुल गांधी के बिना पोस्टर पर औचित्य नहीं है। बिहार का चुनाव केवल राहुल गांधी की तस्वीर पर जीता जा सकता है। सभी नेताओं की तस्वीर होनी चाहिए।”
अशोक गहलोत ने दावा किया कि चुनावी माहौल बनाने में BJP ने महागठबंधन में विवाद पैदा करने का प्रयास किया।
तेजस्वी यादव का संदेश: बिहार में बदलाव और प्रगति
तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल मुख्यमंत्री बनने का नहीं है, बल्कि बिहार में बदलाव और सुधार लाना है। उन्होंने कहा:
“हम मुख्यमंत्री बनने या सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि बिहार को बदलने के लिए काम कर रहे हैं।”
एनडीए की स्थिति और चुनावी तैयारी
एनडीए गठबंधन के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्य में तीन जगहों पर चुनावी रैलियां करेंगे। इस बीच महागठबंधन ने सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा कर अपनी रणनीति को स्पष्ट किया है।
चुनावी पृष्ठभूमि और मतदान
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं। राज्य में दो चरणों में मतदान होंगे: 6 और 11 नवंबर। मतगणना का दिन 14 नवंबर निर्धारित है। NDA और महागठबंधन दोनों ही पूरी ताकत के साथ चुनाव में सक्रिय हैं।
राज्य में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान विपक्षी दलों की एकजुटता दिखी थी, लेकिन चुनाव नज़दीक आते ही कई मुद्दों पर असहमति और आपसी भिड़ंत दिखाई दी।
RJD और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों की संख्या कम कर दी है, लेकिन विधानसभा की 12 सीटों पर महागठबंधन के घटक दल आमने-सामने हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबला मुख्य रूप से बदलाव और विकास के मुद्दे पर केंद्रित है। तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने का ऐलान महागठबंधन की रणनीति और जनता के संदेश को स्पष्ट करता है। उम्मीदवारों की घोषणा, उपमुख्यमंत्री पद पर मुकेश सहनी का नाम और फ्रेंडली फाइट का खत्म होना गठबंधन के भीतर संतुलन और तैयारी की दिशा दिखाता है।











