आरा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के सांसद सुदामा प्रसाद ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शनिवार को राजग पर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद भाजपा नीतीश कुमार को भी उसी तरह “हाशिए पर” धकेल सकती है, जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के साथ हुआ। सुदामा प्रसाद ने साफ कहा कि राजग को मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवार का नाम घोषित करना चाहिए, ताकि जनता को पता हो कि उनका चेहरा कौन होगा।
सुदामा प्रसाद ने कहा कि बिहार में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है, लेकिन सत्ताधारी राजग इस मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए “जंगल राज” का हौवा खड़ा कर रही है। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन इस बार प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करेगा, और उन्होंने कहा, “हम 200 से ज्यादा सीट जीतेंगे। अब राजग बताए कि उनका मुख्यमंत्री का चेहरा कौन है? क्या फिर से नीतीश जी ही होंगे?”
महागठबंधन ने हाल ही में पटना में संवाददाता सम्मेलन कर राजद नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। सुदामा प्रसाद ने कहा कि 2020 में जब अमित शाह बिहार आए थे, तो उन्होंने कहा था कि नीतीश ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन अब वही जवाब बदल गया है कि “विधायक तय करेंगे।” उन्होंने इसे भाजपा की नियत पर सवाल बताया।
सुदामा ने भाजपा पर महाराष्ट्र और ओडिशा में अपने गठबंधन नेताओं को हाशिए पर धकेलने का उदाहरण देते हुए कहा, “भाजपा चुनाव के बाद किसी को भी कुचल देती है। वही नीतीश कुमार के साथ भी हो सकता है।” उन्होंने राजग को चुनौती दी कि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार स्पष्ट करें।
महागठबंधन के भीतर मित्रवत मुकाबलों के सवाल पर प्रसाद ने कहा कि प्रत्येक सीट पर एक ही उम्मीदवार होगा और भाजपा द्वारा विपक्ष को कमजोर करने की कोशिशों का उन्हें अंदेशा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के “जंगल राज” के आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेरोजगारी और विकास के मुद्दे से ध्यान भटकाने की चाल है।
सुदामा ने कहा, “बिहार के युवा रोजगार चाहते हैं। महागठबंधन ने पिछले 17 महीनों में पांच लाख नौकरियां दीं। मोदी जी बताएं कि उन्होंने कितनी नौकरियां दीं?” उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराधों और प्रशासनिक असफलताओं का भी जिक्र किया और दावा किया कि महागठबंधन सत्ता में आने पर भोजपुर जिले की सभी सात सीटें और मध्य बिहार में कृषि पर निर्भर क्षेत्र जीत जाएगा।
सुदामा प्रसाद ने अंत में कहा कि मतदाता सूची में गहन पुनरीक्षण और नाम हटाने के बावजूद राजग की हार निश्चित है, और जनता अब विकास और रोजगार की राजनीति पर भरोसा करेगी, न कि वादों और अफवाहों पर।











