नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय सोमवार को फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) मामले में कार्यकर्ताओं उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ द्वारा की जा सकती है। शीर्ष अदालत ने 22 सितंबर को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
कार्यकर्ताओं ने दो सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में फरवरी 2020 के दंगों के सिलसिले में यूएपीए के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम समेत नौ लोगों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में “षड्यंत्रकारी” हिंसा की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इन नौ आरोपियों में शामिल थे: शरजील इमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद।
एक अन्य आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका भी उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी।
खालिद, इमाम और अन्य पर 2020 के दंगों का मुख्य षड्यंत्रकारी होने के आरोप हैं। इन दंगों में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए। हिंसा तब भड़की जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे थे।
आरोपी 2020 से जेल में हैं और उन्होंने खारिज की गई जमानत याचिका के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अब मामला सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के लिए सोमवार को सूचीबद्ध है।










